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राज्यपाल के अभिभाषण में विपक्ष का वॉकआउट, अकाली-भाजपा विधायकों ने झुनझुना बजाया

Thu, 16 Jan 2020 11:04 PM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
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अकाली दल विधायकों ने किया वॉक आउट। - फोटो : अमर उजाला
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पंजाब विधानसभा के विशेष सत्र के पहले दिन की शुरुआत राज्यपाल वीपी सिंह बदनौर द्वारा सदन में पढ़े गए अभिभाषण से हुई। राज्यपाल ने तीन साल के दौरान राज्य सरकार द्वारा घोषित की गई योजनाओं की सराहना की, लेकिन अभिभाषण में किसी नई विकास योजना, राज्य के पानी-बिजली से जुड़े मुद्दे और पंजाबी भाषी इलाकों, पवित्र ग्रंथों की बेअदबी और नागरिकता संशोधन एक्ट (सीएए) पर राज्य सरकार के रुख जैसे मुद्दे नदारद रहे। राज्यपाल ने सूबे के खाली खजाने का हवाला देते हुए भी सरकार के प्रयासों की प्रशंसा की। राज्यपाल ने श्री गुरु नानक देव जी के 550वें प्रकाश पर्व के सफल आयोजन, पंजाब मैराथन और मिलिट्री फेस्ट को राज्य सरकार की उपलब्धियों के रूप में सराहा।
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वीरवार को विधानसभा सत्र सुबह 11 बजे राज्यपाल ने जैसे ही अभिभाषण पढ़ना शुरू किया, अकाली दल के सदस्य हाथों में बच्चों वाले झुनझुने और कांग्रेस सरकार द्वारा जनता से किए वादों संबंधी पोस्टर लेकर अपनी सीटों पर खड़े हो गए और हंगामा करने लगे। इस दौरान आम आदमी पार्टी के सदस्य शांति से सदन में बैठे रहे लेकिन कुछ समय बाद वे भी बिजली की दरों में बढ़ोतरी के मुद्दे को लेकर नारेबाजी करते हुए पहले वेल में आए और उसके बाद सदन से वाकआउट कर गए। इसके तुरंत बाद ही अकाली दल के सदस्य भी सदन से वाकआउट कर गए, जबकि राज्यपाल इस दौरान अभिभाषण पढ़ रहे थे।

राज्यपाल ने अपने अभिभाषण की शुरुआत, सरकार द्वारा इस सत्र के दौरान एससी-एसटी वर्ग को आरक्षण की अगले दस साल और सुविधा प्रदान करने संबंधी लाए जा रहे 126वें संवैधानिक संशोधन बिल का उल्लेख करते हुए भरोसा दिलाया कि राज्य सरकार दलितों के विकास प्रतिबद्ध है। बीते साल के दौरान राज्य सरकार की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए उन्होंने 2019 के दौरान श्री गुरु नानक देव जी का 550वां प्रकाश पर्व, महात्मा गांधी की 150वीं जयंती और जलियांवाला बाग नरसंहार का 100वां स्मृति वर्ष के आयोजनों को याद किया। इसके साथ ही उन्होंने नए साल में जैन धर्म के श्वेताम्बर तेरापंथ के 10वें प्रमुख आचार्य श्री श्री प्रज्ञा की जन्म शताब्दी, श्री गुरु तेग बहादुर जी की 399वीं जयंती और बाबा बंदा सिंह बहादुर जी की 350वीं जयंती के भव्य आयोजनों के प्रस्ताव भी रखे।
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राज्यपाल ने कहा कि सरकार ने लगभग तीन साल पूरे कर लिए हैं और इस अवधि के दौरान सरकार ने संसाधनों की कमी और विरासत में मिले खाली खजाने के बावजूद अपनी प्रतिबद्धताओं को पूरा करने के हरसंभव प्रयास किए हैं। उन्होंने दावा किया कि राज्य सरकार ने अर्थव्यवस्था व उद्योगों को पुनर्जीवित किया है और राज्य में कानून-व्यवस्था में भी व्यापक सुधार किया है। इसके तहत राज्यपाल ने गैंगस्टरों की धरपकड़, आतंकी मॉड्यूल ध्वस्त करने, नशे के कारोबार पर लगाम कसने जैसी राज्य पुलिस की उपलब्धियों का जिक्र किया। उन्होंने जनसेवकों के बीच भ्रष्टाचार खत्म किए जाने के सतर्कता ब्यूरो के प्रयासों का विवरण भी प्रस्तुत किया।

राज्यपाल ने कहा कि सरकार ने 1.89 लाख नौकरियां सृजित कीं और तीन साल में 57,735 करोड़ के निवेश प्रस्ताव आए। लुधियाना के धनासू में हाईटेक साइकिल वैली और नाभा में आधुनिक फोकल प्वाइंट का भी उन्होंने जिक्त्रस् किया। कृषि अर्थव्यवस्था का उल्लेख करते हुए उन्होंने पंजाब में गेहूं और धान के रिकार्ड उत्पादन की सराहना की, जिससे किसानों को अतिरिक्त पारिश्रमिक प्राप्त हुआ। इसके साथ ही उन्होंने राज्य की तीन नदियों- रावी, ब्यास और सतलुज के नहरीकरण की राष्ट्रीय परियोजना की मांग भी उठाई। राज्यपाल ने शिक्षा, शहरी विकास और मूलभूत ढांचे कि विकास से जुड़ी राज्य सरकार की विभिनन योजनाओं का भी उल्लेख अपने अभिभाषण में किया।

राज्यपाल के अभिभाषण में विपक्ष का वॉकआउट

विशेष सत्र के पहले दिन राज्यपाल के अभिभाषण के दौरान नारेबाजी करते हुए विपक्ष ने वॉकआउट कर दिया। आम आदमी पार्टी ने महंगी बिजली को मुद्दा बनाया। जबकि, शिरोमणि अकाली ने सरकार पर लोगों से वादाखिलाफी का आरोप लगाया। सत्र शुरू होते ही अकालियों ने नारेबाजी शुरू कर दी। अकाली-भाजपा विधायकों ने तख्तियां ले रखी थीं। जिन पर अलग-अलग मुद्दे लिखे थे। कुछ ही देर में उन्होंने झुनझुने बजाने शुरू कर दिए।

अभिभाषण के साथ नारेबाजी भी चलती रही। इस दौरान कांग्रेस के एक-दो विधायकों ने हंसते हुए उन पर व्यंग्य भी किए। उसके बाद सभी सदस्य अपनी सीटों पर बैठ गए। इसी बीच राज्यपाल ने बिजली के मुद्दे पर आधारित पैराग्राफ पढ़ा। इसकेसाथ ही अमन अरोड़ा और बाकी आप विधायक खडे़ होकर नारेबाजी करने लगे। अमन ने अकाली-भाजपा सरकार के कार्यकाल में निजी थर्मल प्लांटों के साथ हुए समझौतों की कॉपी थी।

आप विधायक वेल में आ गए, उन्होंने समझौतों के लिए कांग्रेस और अकाली-भाजपा, दोनों को जिम्मेदार ठहराया। कुछ देर नारेबाजी केबाद उन्होंने वाक आउट कर दिया। अरोड़ा ने बिजली समझौते रद्द करने के संबंध में प्राइवेट मेंबर बिल लाने की इजाजत मांगी थी। जिसे स्पीकर राणा केपी सिंह ने मंजूर नहीं किया। आप ने इसके विरोध में वाक आउट किया।

आप विधायकों के जाने के दो मिनट बाद ही अकाली-भाजपा विधायक भी खड़े होकर नारेबाजी करने लगे। आखिर झुनझुने बजाते हुए उन्होंने भी वाक आउट कर दिया। शिअद विधायक दल के नेता शरनजीत ढिल्लों ने सदन के बाहर पत्रकारों से कहा कि यह राज्यपा का चौथा अभिभाषण है पर अब तक कांग्रेस सरकार ने किसी भी वर्ग से किया वादा पूरा नहीं किया।

शिअद ने विधानसभा के बाहर भी इसी मुद्दे पर झुनझुने लेकर प्रदर्शन किया था। वहीं, नेता प्रतिपक्ष हरपाल चीमा ने मीडिया से बातचीत में कहा कि राज्यपाल का अभिभाषण झूठ का पुलिंदा था। सरकार ने तीन साल में एक भी वादा पूरा नहीं किया, अब राज्यपाल से झूठ बुलवा रही है।
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अकाली दल ने झुनझुने लेकर विधानसभा के बाहर किया प्रदर्शन

शिरोमणि अकाली दल ने सत्र से पहले विधानसभा के बाहर झुनझुने लेकर प्रदर्शन किया। पार्टी ने आरोप लगाया कि आप और कांग्रेस के बीच समझौता हो गया है ताकि लोगों की मांगे पूरी न की जाएं। शिअद विधायक दल के नेता शरनजीत ढिल्लों ने कहा कि हरपाल चीमा को सिर्फ अपनी कुर्सी बचाने की चिंता है। चार विधायक सुखपाल खैरा, मास्टर बलदेव, निर्मल मानशाइया और अमरजीत संदोआ सदस्यता बचाने में लगे हैं। कांग्रेस ने समाज के हर वर्ग को धोखा दिया है। यह राज्यपाल का चौथा अभिभाषण था, पर अभी तक लोगों से किए वादे पूरे नहीं किए गए।

 किसानों की आत्महत्याएं चरम पर हैं, सरकार पूर्ण कर्ज माफी लागू नहीं कर सकी है। घर-घर नौकरी, ढाई हजार बेरोजगारी भत्ता और मोबाइल फोन भी नौजवानों को नहीं मिले हैं। चाउंदा है पंजाब, कैप्टन तों जवाब के नारों के बीच ढिल्लों ने कहा कि सरकार ने एससी वर्ग को भी धोखा दिया है। एससी छात्रों को स्कॉलरशिप नहीं मिल रही है। शगुन और आटा दाल स्कीम का भी यही हाल है। यह सत्र सरकार के लिए औपचारिकता है, जो पंजाब के प्रमुख मुद्दों पर बहस नहीं करना चाहती। राज्यपाल वीपी सिंह बदनौर ने बहुत से पैराग्राफ पढ़े ही नहीं क्योंकि वह खुद पंजाब के लोगों की पीड़ा से व्यथित हैं।

सरकारी मुलाजिमों को पांच हजार करोड़ का डीए एरियर नहीं दिया गया। पर सरकार अपने सलाहकारों की फौज पर करोड़ों खर्च कर रही है जोकि संविधान का उल्लंघन कर नियुक्त किए गए हैं। अकालियों ने छठे पे-कमीशन की रिपोर्ट जारी न करने और 27000 कच्चे मुलाजिमों को रेगुलर न करने के लिए भी सरकार की आलोचना की।
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