अकाली सांसद रणजीत सिंह ब्रह्मपुरा ने सीनियर उपप्रधान एवं कोर कमेटी की सदस्यता से मंगलवार को इस्तीफा दे दिया। इससे पहले शिरोमणि अकाली दल बादल के पूर्व महासचिव सुखदेव सिंह ढींढसा भी पार्टी के सभी पदों से इस्तीफा दे चुके हैं। ब्रह्मपुरा के इस्तीफे से पार्टी हाईकमान को बड़ा झटका लगा है। पार्टी प्रधान सुखबीर बादल को भेजे पत्र में ब्रह्मपुरा ने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता पर बने रहने की अपनी वचनबद्धता दोहराई है।
ढींढसा की तरह ब्रह्मपुरा ने भी इस्तीफे का प्रमुख कारण गिरती सेहत बताया है। वहीं पंथक सूत्रों की मानें तो ब्रह्मपुरा ने अकाल तख्त के पूर्व जत्थेदार गुरबचन सिंह की ओर से गुरमीत राम रहीम सिंह को माफी देने एवं श्री गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी के खिलाफ इस्तीफा दिया है। इस्तीफे की घोषणा के दौरान उन्होंने साफ किया कि पिछले दिनों पूर्व अकाली सरकार के दौरान हुई इन घटनाओं एवं शिअद हाईकमान की ओर से उस समय सख्त कार्रवाई ना कर पाने के रोष स्वरूप ही उन्होंने श्री अकाल तख्त पर अरदास कर भूल भी बख्शाई थी।
ब्रह्मपुरा का कहना है कि उनके मन पर इन घटनाओं का बोझ है। इस्तीफा देकर वह काफी सुकून महसूस कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि उस समय पार्टी हाईकमान को आगाह कर सख्त कार्रवाई की मांग की थी लेकिन पार्टी ने इसे गंभीरता से नहीं लिया था। नतीजतन इस तरह की कई घटनाएं हुईं। उन्होंने दावा किया कि पार्टी को इसी वजह से विधानसभा चुनाव में हार का मुंह देखना पड़ा है। उन्होंने कहा कि वह पार्टी के सिपाही के तौर पर अपनी सेवाएं निभाते रहेंगे।