श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी गुरबचन सिंह ने स्वीकार किया है कि हरियाणा के सिखों की अनदेखी के कारण ही हरियाणा सिख गुरुद्वारा मैनेजमेंट कमेटी बनी। जत्थेदार के इस बयान के बाद एसजीपीसी विवाद में नया उबाल पैदा हो गया है।
अब तक शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी व शिरोमणि अकाली दल हरियाणा के लिए अलग कमेटी बनाने के मामले में हरियाणा की कांग्रेस सरकार के साथ वहां के कुछ सिख नेताओं को जिम्मेदार मानते रहे हैं।
तलवंडी साबो में बुधवार को एक धार्मिक समागम में शिरकत करने आए जत्थेदार ज्ञानी गुरबचन सिंह ने बातचीत में यह माना कि यह सच्चाई है कि हरियाणा के सिखों को अनदेखा किया गया इसीलिए उन्होंने अलग गुरुद्वारा समिति की मांग की।
उनका कहना है कि वे भी चाहते हैं कि हरियाणा के सिखों को उनका हक मिलना चाहिए लेकिन इसके लिए एसजीपीसी में दरार पैदा करने की साजिश गलत है। सिख कौम का फ़ायदा इसी में है कि वे एक झंडे के नीचे इकट्ठे रहें।
कौम में किसी तरह का विवाद नहीं होने देना चाहते
सिख सम्मेलन रद्द करने के लिए हुक्मनामा जारी करने के बारे में उन्होंने कहा कि श्री अकाल तख़्त साहब के जत्थेदार का पहला फर्ज होता है कि वह कौम में किसी तरह का विवाद न होने दे और कौम को आपसी जंग से बचाए।
वे अपना यही काम कर रहे हैं। हरियाणा के सिख नेताओं और एसजीपीसी में आपसी जंग व विवाद रोकने के लिए ही हुक्मनामे जारी किए गए।
अकाल तख्त की तरफ से हरियाणा के सिखों को ऐसे गुरुद्वारों का प्रबंध न संभालने के हुक्मनामे के बारे में उन्होंने कहा कि एचएसजीएमसी के प्रधान जगदीश झींडा एक सुलझे हुए और समझदार नेता हैं। वे इस हुक्मनामे पर ज़रूर अमल करेंगे।
झींडा तनखैया हैं, इसलिए रोका गया माथा टेकने से
जब उनको पूछा गया कि अगर झींडा सुलझे हुए सिख नेता हैं तो उन्हें श्री अकाल तख्त साहिब पर नतमस्तक होने से क्यों रोका गया तो जत्थेदार ने कहा कि सिख मर्यादा के अनुसार कोई भी सिख या किसी भी धर्म का इंसान श्री हरमंदिर साहिब में तो माथा टेक सकता है लेकिन कोई पतित या तनख़ैया सिख श्री अकाल तख्त साहिब पर जाकर माथा नहीं टेक सकता।
झींडा को तनख़ैया करार दिया हुआ है इसलिए उन्हें श्री अकाल तख्त साहिब में माथा नहीं टेकने दिया गया। इस मौके पर उनके साथ तख्त श्री केशगढ़ साहिब के जत्थेदार ज्ञानी मल्ल सिंह और शिरोमणि पंथ अकाली बूढ़ा दल के प्रमुख बाबा बलबीर सिंह भी मौजूद थे।