चंडीगढ़। वैश्विक सैन्य क्षमताओं में तेजी से बदलाव आ रहे हैं इसलिए भारत के लिए जरूरी है कि साइबर और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग करके वायु रक्षा क्षमताओं को मजबूत करे। यह विचार मिलिट्री लिट्रेचर फेस्टिवल के पहले दिन पैनल डिस्कसन में विशेषज्ञों ने रखे।
बहुक्षेत्रीय युद्ध में वायु शक्ति और ऑपरेशन सिंदूर विषय पर आयोजित पैनल डिस्कसन में लेफ्टीनेंट जनरल राज शुक्ला ने कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था पाकिस्तान से दस गुनी ज्यादा है। यह सेना की रक्षा प्रणालियों में भी दिखाई देनी चाहिए। उन्होंने कहा कि रक्षा प्रणाली को प्रभावित करने वाले संरचनात्मक मुद्दों के सर्जिकल उन्मूलन की आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि इलेक्ट्रॉनिक युद्ध, अंतरिक्ष और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में प्रभुत्व के बगैर हमारी वायु शक्ति बेहतर नहीं होगी। उन्होंने कहा कि इसरो के पास सैन्य क्षमताएं सीमित हैं। हम यदि आज अपनी वायु रक्षा क्षमताओं पर ध्यान केंद्रित नहीं करते हैं तो हमें पाकिस्तान के खिलाफ भारी पड़ सकता है।
एयर मार्शल (डॉ.) राजीव सचदेवा ने पावर प्वाइंट प्रेजेंटेशन से बताया कि किसी भी रक्षा ऑपरेशन को बाधा रहित करने के लिए कैसे हितधारकों की भूमिका होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि हमें अपने बुनियादी ढांचे और सूचना युद्ध क्षमताओं को और मजबूत करने की जरूरत है।
उन्होंने कहा कि एचएएल के अध्यक्ष को सिर्फ 2-3 साल का कार्यकाल देकर अगले 30-40 सालों के लिए रक्षा दृष्टिकोण को लागू करने की योजनाएं बनाने की जिम्मेदारी देना उन कई चुनौतियों में से एक है जिनमें सुधार की जरूरत है। इस दौरान मेजर जनरल जॉन केंडल के नेतृत्व में यूनाइटेड किंगडम से आए एक सैन्य प्रतिनिधिमंडल ने दर्शकों को भारत और ब्रिटेन की सशस्त्र सेनाओं की साझा सैन्य विरासत के बारे में जानकारी दी।