फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

एआई कानून के क्षेत्र में ला रहा बदलाव, लेकिन न्याय का मूल आधार मानवीय समझ: महेश्वरी

विज्ञापन
विज्ञापन
चंडीगढ़। पीयू में बुधवार को 7वीं लॉ कन्वोकेशन का आयोजन साउथ कैंपस के मल्टी-पर्पज ऑडिटोरियम में किया गया। इस दौरान कुल 601 छात्रों को कानून की डिग्री प्रदान की गई। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के कई वरिष्ठ अधिकारी और अतिथि मौजूद रहे।
विज्ञापन

मुख्य अतिथि लॉ कमीशन ऑफ इंडिया के चेयरमैन और सेवानिवृत्त जस्टिस दिनेश महेश्वरी ने अपने संबोधन में कहा कि आज का दौर तेजी से बदलती तकनीक का है, जिसमें एआई कानून के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। एआई केस लॉ का विश्लेषण करने, दस्तावेज तैयार करने और पैटर्न पहचानने में मदद करता है, लेकिन न्याय केवल तकनीक से नहीं हो सकता। न्याय का मूल आधार केवल मानवीय समझ है।
उन्होंने स्पष्ट कहा कि कानून सिर्फ एक एल्गोरिद्म नहीं है, बल्कि इसमें मानवीय संवेदनशीलता, समझ और नैतिक सोच की जरूरत होती है। मशीन इंसान की तरह न्याय का सही आकलन नहीं कर सकती।
विज्ञापन

कार्यक्रम में पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट के जस्टिस शील नागू विशेष अतिथि के रूप में मौजूद रहे। वहीं विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. रेनू विग, डीन प्रो. योजना रावत, रजिस्ट्रार प्रो. वाईपी. वर्मा, परीक्षा नियंत्रक प्रो. जगत भूषण, लॉ विभाग की चेयरपर्सन प्रो. वंदना अरोड़ा और यूआईएलएस की डायरेक्टर प्रो. श्रुति बेदी भी कार्यक्रम में शामिल हुए। कार्यक्रम की शुरुआत प्रो. वंदना अरोड़ा और प्रो. श्रुति बेदी ने अतिथियों के स्वागत से की, जबकि अंत में रजिस्ट्रार प्रो. वाईपी वर्मा ने कन्वोकेशन के समापन की घोषणा की।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें