हरियाणा साहित्य अकादमी की ओर से शनिवार को 21वीं मासिक काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। इस मौके पर लीलाधर मंडलोई, कवि एवं निदेशक भारतीय ज्ञानपीठ नई दिल्ली बतौर मुख्य अतिथि मौजूद रहे। गोष्ठी का शुभारंभ मां सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यार्पण के साथ किया गया। इस मौके पर अकादमी के निदेशक डॉ. श्याम सखा ‘श्याम’ ने अतिथियों का स्वागत किया।
गोष्ठी में विशेष आमंत्रित कवि के रूप में मौजूद कवि एवं साहित्यकार लीलाधर मंडलोई श्रोताओं को कविता के रंगों से अवगत कराया। जीवन के कुछ ऐसे शेयर थे बाजार में जो घाटे के थे, लेकिन खरीदे मैंने, लाभ के लिए नहीं दौड़ा मैं, कंगाल हुआ और खुश हूं मेरे शेयर सबसे कीमती थे। दूसरी कविता जिनका सिराहना ताउम्र पत्थर रहा हो, उन्हें तकिए पर नींद नहीं आती/पत्थर की कोमलता हर कोई नहीं जानता।
इस मौके पर अकादमी के निदेशक, डॉ. श्याम सखा श्याम ने बेहतरीन प्रस्तुति पेश कर, खूब तारीफ बटोरी। उन्होंने भागते हम थे रहे भाग मिल्खा की तरह/उम्र बीती पर काम सारा रह गया। बेटे बेटियां सभी जा बसे परदेश में/खांसी, खुर्रा, दमकशी का बस सहारा रह गया सुनाई। कार्यक्रम में विष्णु सक्सेना, नरेन्द्र कुमार आहूजा, जसविन्दर शर्मा, चन्द्र भार्गव, प्रेम विज, मीरा गौतम, शशि प्रभा एवं सुशील हसरत नरेलवी ने भी कविता पाठ किया। गोष्ठी में मंच संचालन डॉ. विजेन्द्र ने किया।