नेता प्रतिपक्ष हरपाल सिंह चीमा ने तीनों तख्तों से शुरू हुई शिअद (बादल) की ट्रैक्टर रैली को नाटक बताया है। उन्होंने कहा कि अब यही अकाली दल अपनी खिसकती राजनीतिक जमीन हासिल करने और सिखों की धार्मिक भावनाओं का फायदा उठाकर राजनीतिक ताकत हासिल करने को तीनों तख्त साहिबानों से राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन की शुरुआत की है।
इससे पंजाबियों और पंथ रूपी संगत में भारी रोष है। हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि जब तक मोदी सरकार ने किसान विरोधी विधेयक पास नहीं किए तब तक तो शिअद ने भाजपा की हां में हां मिलाई। सुखबीर बादल भाजपा का गुणगान कर रहे थे और बैठकों में कृषि विरोधी काले-कानूनों की जोरशोर से वकालत करते रहे।
पंथ और किसानों के साथ विश्वासघात कर चुकी है शिअद: रंधावा
कैबिनेट मंत्री सुखजिंदर सिंह रंधावा ने कहा कि श्री आनंदपुर साहिब प्रस्ताव को भुलाने वाले सुखबीर सिंह बादल के नेतृत्व वाले दल को तीन तख्त साहिबान से मार्च निकालते समय शर्म क्यों न आई। रंधावा ने कहा कि बादल परिवार के अकाली नेतृत्व ने सबसे पहले श्री आनंदपुर साहिब प्रस्ताव को तिलांजलि दी।
संघीय ढांचे को चोट पहुंचाते हुए जब केंद्र सरकार ने कृषि कानून बनाने से पहले अध्यादेश पास किए तो उस समय अकाली नेता हरसिमरत कौर बादल कैबिनेट का हिस्सा थीं। आज पंजाब के लोगों खासकर किसानों को गुमराह करने के लिए शिअद किस मुंह के साथ मार्च निकाल रहा है। अब अकाली दल सबसे छोटी अंगुली में खून लगाकर शहीद बनने का नाटक कर रहा है।
पंजाब के तीन तख्तों से शुरू हुआ शिअद का किसान मार्च
नए कृषि कानूनों के विरोध में पंजाब के तीन तख्तों से गुरुवार को शिरोमणि अकाली दल का किसान मार्च शुरू हुआ। पार्टी अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल और माझा के वरिष्ठ नेताओं ने सुबह करीब सवा नौ बजे अमृतसर में श्री अकाल तख्त साहिब में माथा टेककर नए कृषि कानून के विरुद्ध किसान मार्च शुरू किया।
जगह-जगह रहा ट्रैफिक जाम।
सुखबीर ने राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद से मांग की है कि वह किसानों के मुद्दे पर संसद का विशेष इजलास बुलाएं ताकि इन किसान विरोधी कानून को रद्द किया जा सके। मार्च में करीब 150 गाड़ियां थीं। सुखबीर बादल एक खुले वाहन में बिक्रम सिंह मजीठिया, गुलजार सिंह रणिके, तलबीर सिंह गिल, गुरप्रताप सिंह टिक्का और अन्य अकाली नेताओं के साथ एक काफिले में मोहाली रवाना हुए।
जिले से शिअद की 300 गाड़ियों की अगुवाई कर रहे पूर्व विधायक सरूप चंद सिंगला ने कहा कि केंद्र की ओर से बनाए गए कृषि कानूनों के विरोध में अकाली दल को जो भी लड़ाई लड़नी पड़ी वह लड़ी जाएगी। इस दौरान शिअद कार्यकर्ता राष्ट्रीय राजमार्ग पर गलत साइड में गाड़ियों को चलाकर ट्रैफिक नियम तोड़ते नजर आए। इसका एक वीडियो सोशल मीडिया पर भी वायरल हो रहा है।
श्री आनंदपुर साहिब से सुबह 11 बजे शिरोमणि अकाली दल का विशाल किसान मार्च रवाना हुआ। किसान मार्च शुरू करने से पहले तख्त श्री केसगढ़ साहिब में अरदास की गई। यह मार्च पूर्व सांसद प्रो. प्रेम सिंह चंदूमाजरा और पूर्व शिक्षा मंत्री डॉ. दलजीत सिंह चीमा की अगुवाई में निकाला गया।
किसान मार्च बेशक श्री आनंदपुर साहिब से शुरू हुआ लेकिन पड़ाव दर पड़ाव काफिले में कार्यकर्ता का इजाफा होता रहा। श्री कीरतपुर साहिब, भरतगढ़ और घनौली से अकाली कार्यकर्ता किसान मार्च में शामिल हुए। लगभग सौ गाड़ियों का काफिला श्री आनंदपुर साहिब से चंडीगढ़ रवाना हो गया। इस दौरान अकाली नेता कोविड-19 के संबंध में जारी निर्देशों का पालन करना पूरी तरह भूल गए। मार्च में सामाजिक दूरी का ध्यान नहीं रखा गया।
वहीं चंडीगढ़ की सीमाएं सील कर दी गई थीं। यूटी के चार बैरियर पर पंजाब और चंडीगढ़ के 2400 से अधिक पुलिस कर्मी तैनात रहे। आठ वज्र वाहन, गैस वाहन और इतनी ही संख्या में फायर ब्रिगेड तैनात रही। मोहाली के फेज छह, मतार बेरियर, जीरकपुर और मुल्लापुर बेरियर से चंडीगढ़ में किसानों ने प्रवेश किया। इन्हें रोकने के लिए मुल्लांपुर, मटौर, जीरकपुर सीमा इलाका समेत अन्य जगहों पर पुलिस की तैनाती की गई।
सीआईडी समेत अन्य शाखाएं अलर्ट
हजारों किसानों के रैली में पहुंचने की खबर से पुलिस अलर्ट रही। इसके साथ सीआईडी समेत अन्य शाखाएं भी नजर रखे रहीं। पुलिस के अनुसार, किसानों को चंडीगढ़ में आने से रोकने के लिए सीमांत इलाकों में मजबूत इंतजाम किया गया।