आखिरकार तीन दौर की वार्ता के बाद जाटों और सरकार के बीच वीरवार को करीब-करीब सुलह हो गई। पानीपत रिफाइनरी के सामुदायिक केंद्र में शिक्षा मंत्री रामबिलास शर्मा की अध्यक्षता में गठित समिति और अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति के नेताओं के बीच करीब साढ़े तीन घंटे में पांच चरण की वार्ता के दौरान जाट समाज की सभी सात मांगों पर सकारात्मक सहमति बन गई। मुख्यमंत्री व समिति की कोर कमेटी शुक्रवार को दिल्ली स्थित हरियाणा भवन में संयुक्त प्रेस कांफ्रेंस कर वार्ता का विस्तृत ब्योरा मीडिया के सामने रखेंगे और उम्मीद जताई जा रही है कि इसके बाद अंादोलन वापस लेने की घोषणा की जा सकती है। उधर प्रदेश भर में धरने 47वें दिन भी जारी रहे और 20 मार्च को दिल्ली कूच की तैयारियां चलती रही। चूंकि अभी आंदोलन खत्म करने की घोषणा नहीं हुई है, ऐसे में पुलिस और प्रशासन पूरी तरह अलर्ट हैं।
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शाम करीब छह बजे बैठक समाप्त होने के बाद जाट नेताओं के चेहरे खिले नजर आए और मंत्रियों व अधिकारियों बधाई देते दिखे। हालांकि उन्होंने इतना ही कहा कि बातचीत का खुलासा कल दिल्ली में करेंगे। अपुष्ट सूत्रों की माने तो सरकार ने जाट नेताओं की मांग पर पिछले आरक्षण आंदोलन में दर्ज मुकदमों को वापस लेने को लेकर एसआईटी गठित करने का फैसला लिया है। वहीं आंदोलन में मारे गए लोगों व गंभीर घायलों के आश्रित परिवार को योग्यता अनुसार सरकारी नौकरी व मुआवजा देने पर भी सहमति बनी। वित्त मंत्री कैप्टन अभिमन्यु के आवास पर आग लगाने के मामले में सीबीआई को सौंपी जांच भी वापस ली जा सकती है।
ऐसे में दिल्ली कूच से पहले ही प्रदेशभर में चल रहे धरने वापस लिए जा सकते हैं। बैठक में कई बार गर्मागर्मी भी हुई, लेकिन दोनों पक्षों ने एक-दूसरे को समझते हुए खुद को कंट्रोल किया। यहीं कारण रहा कि चौथे चरण की बैठक में समिति के राष्ट्रीय महासचिव अशोक बल्हारा बाहर ही रह गए। अपुष्ट सूत्रों की माने तो पहला बड़ा मामला प्रदेश व केंद्र में जाटों समेत छह जातियों को आरक्षण देने वाला रहा। हाईकोर्ट में केस होने पर सरकार ने स्पष्ट कहा कि वे पैरवी प्रमुखता के साथ करेंगे। जाट समाज अपने कानूनी विशेषज्ञों को भी इसमें शामिल कर सकता है।
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मुद्दे जो सबसे ज्यादा उछले
सरकार और जाटों में बनी सहमति
- फोटो : अमर उजाला
मुद्दे जो सबसे ज्यादा उछले
-आरक्षण देने का मुद्दा: जाट नेताओं की मांग जाटों को केंद्र की ओबीसी श्रेणी में शामिल कराया जाए, प्रदेश में छह जातियों को आरक्षण पर हाईकोर्ट की रोक हटवाई जाए और संविधान की नौंवी सूची में डाला जाए। इस पर मंत्रियों की कमेटी ने कहा कि सरकार का सकारात्मक रुख रहेगा। सरकार जाटों की कानूनी लड़ाई लड़ेगी।
-केस वापसी: जाट नेताओं की दूसरी मांग आंदोलन के दौरान दर्ज सभी केस वापस लेने की थी। इस पर सरकार के प्रतिनिधियों ने कहा कि पहले से ही एक हजार से ज्यादा केस वापस लिए जा चुके हैं। मुकदमे वापस लेने के लिए अलग से एसआईटी गठित की जाएगी। यह टीम अगले 15 दिनों में अपनी रिपोर्ट देगी। इसकी रिपोर्ट के बाद खारिज होने वाले मुकदमों पर तुरंत फैसला लिया जाएगा। जबकि बाकी मामलों पर कानूनी राय लेकर स्थगित किया जाएगा।
-जेलों में बंद युवाओं की रिहाई: जाट नेताओं की जेलों में बंद युवाओं को छोड़ने की मांग पर सरकार की ओर से कहा गया कि ये एकदम से संभव नहीं है। कानूनी पेच को देखते हुए सभी केसों की अलग-अलग तारीखों पर ऐसा किया जा सकता है, लेकिन इसमें समय लगेगा।
-मृतकों के परिजनों को स्थायी नौकरी: सरकार ने कहा कि कई मृतकों के परिजनों को सरकार डीसी रेट पर नौकरी दे चुकी है। पक्की नौकरी फिलहाल दे पाना संभव नहीं, आगे जब कभी ऐसी पॉलिसी बनेगी तो उनको पक्का किया जा सकता है।
-मुआवजा और अपंगों को नौकरी: आंदोलन के दौरान घायल लोगों को उचित मुआवजा और अपंगों को नौकरी देने की मांग पर सरकार की ओर से कहा गया कि नियमानुसार मुआवजा दिया जा चुका है। अपंगों को नौकरी देने के बारे में विचार किया जाएगा।
-सांसद राजकुमार सैनी के खिलाफ कार्रवाई: सैनी के खिलाफ कार्रवाई की मांग पर सरकार ने इसे संगठन का मामला बताते हुए संगठन के सामने रखने की बात कही।
-जातीय द्वेष फैलाने वाले कर्मचारियों व अधिकारियों पर कार्रवाई और जांच: जाट नेताओं की इस मांग पर सरकार की ओर से कहा गया कि पहले भी जांच और कार्रवाई हो चुकी है। अगर किसी मामले में कार्रवाई होने से रह गई है तो जांच के बाद ऐसा किया जाएगा।
किस दौर में क्या बातचीत
सरकार और जाटों में बनी सहमति
पहला चरण
सरकार व समिति के बीच दोपहर बाद 1:58 बजे बैठक शुरू हुई। यह चरण करीब एक घंटे तक चलता रहा। सरकार की तरफ से शिक्षा मंत्री रामबिलास शर्मा व समिति की तरफ से राष्ट्रीय अध्यक्ष यशपाल मलिक ने अपनी-अपनी बातों को रखा। दोनों पक्षों ने एक दूसरे की बातों को सुनने व समझने पर जोर दिया।
दूसरा चरण : दूसरे चरण की बैठक शाम 3:09 बजे शुरू हुई। इसमें मंत्री व अधिकारी अलग हॉल में चर्चा करने चले गए, जबकि समिति पदाधिकारी वहीं पर बैठे रहे। मंत्रियों ने पहले चरण में हुई बातचीत पर विचार विमर्श किया और सरकार के संज्ञान में भी पूरे मामले को डाला।
तीसरा चरण : तीसरे चरण की बैठक करीब 20 मिनट बाद शुरू हुई। इसमें राष्ट्रीय अध्यक्ष यशपाल मलिक व महासचिव अशोक बल्हारा समेत आधा दर्जन जाट नेताओं को उसी हॉल में बातचीत के लिए आमंत्रित किया। इनकी काफी देर तक बातचीत चलती रही।
चौथा चरण : मंत्री व जाट नेता करीब 4:12 बजे वापस पहले वाले हॉल में आ गए। सरकार के मंत्री व जाट नेताओं ने बातचीत को स्पष्ट किया। इसके बाद 4:30 बजे यशपाल मलिक समेत आठ-दस जाट नेता बाहर आ गए और पूरे मामले पर विस्तार से चर्चा की।
पांचवां चरण : सरकार व मंत्रियों की पांचवें चरण की बैठक शुरू हुई। बैठक में करीब 5:23 बजे समिति की प्रमुख मांग पिछले आरक्षण आंदोलन में मारे लोगों के आश्रित परिवारों को योग्यता अनुसार नौकरी व मुआवजे की बात पर सहमति बन गई। बाकी छह मांगों पर भी सहमति जता दी। इसके बाद 5:34 बजे मंत्री व प्रशासनिक अधिकारी बाहर आ गए। जाट नेता अंदर हॉल में बैठक करते रहे। करीब 5:56 बजे वे भी बाहर आना शुरू हो गए।
सौहार्दपूर्ण माहौल में हुई सकारात्मक बैठक : मलिक
अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष यशपाल मलिक ने कहा कि सरकार व जाट नेताओं के बीच सौहार्दपूर्ण माहौल में मीटिंग हुई है। उन्होंने अपनी सभी सात मांगों को प्रमुखता के साथ रखा है। जिन पर सरकार का रवैया सकारात्मक रहा है। समिति ने एक उम्मीद के साथ आंदोलन शुरू किया था और इस आंदोलन में उनकी उम्मीद पूरी होती नजर आ रही हैं। जाट समाज बातचीत के लिए पहले दिन से ही तैयार था। सरकार की तरफ से इसमें देरी की गई। मुख्यमंत्री व समिति की कोर कमेटी शुक्रवार दोपहर दो बजे हरियाणा भवन दिल्ली में सभी बातों को स्पष्ट करेंगे।
सरकार ने समझदारी के साथ आंदोलन को सुलझाया: शर्मा
शिक्षा मंत्री रामबिलास शर्मा और उनकी टीम ने मीडिया से कहा कि जाट नेताओं के साथ सौहार्दपूर्ण माहौल में बैठक हुई है। दोनों पक्षों ने अपनी बातों को रखा और समझा भी। सरकार ने जाट समाज की मांगों पर सकारात्मकता दिखाई है। शर्मा ने कहा कि सरकार ने समझदारी के साथ काम करते हुए आंदोलन को सुलझाया है।
कौन-कौन शामिल रहे वार्ता में
सरकार की तरफ से शिक्षा मंत्री रामबिलास शर्मा, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्य मंत्री कृष्ण कुमार बेदी, मुख्य संसदीय सचिव कमल गुप्ता और एसोसिएट मेंबर महम से भाजपा प्रत्याशी रहे शमशेर खटकड़ा व दादरी से सोमबीर सांगवान शामिल रहे। समिति की तरफ से यशपाल मलिक व राष्ट्रीय महासचि अशोक बल्हारा समेत करीब सौ लोग बैठक में शामिल हुए।