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चंडीगढ़ में एग्रीगेटर नीति लागूः कैब सेवाओं से जुड़ी कई नीतियों में बदलाव... सवारियों को मिलेंगी कितनी राहत

Wed, 25 Jun 2025 09:24 AM IST
निवेदिता वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

मोटर वाहन एग्रीगेटर नियम-2025 चंडीगढ़ में एग्रीगेटर कंपनियों के संचालन को रेगुलेट करने के लिए बनाए गए हैं, जिसमें न केवल पारंपरिक कैब व टैक्सियां शामिल हैं, बल्कि सीएनजी रिक्शा, ई-रिक्शा, ई-बाइक और बाइक टैक्सी जैसे सभी मोटर वाहन भी शामिल हैं, जो मोटर वाहन अधिनियम के तहत आते हैं।
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Cabs - फोटो : Adobe Stock
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विस्तार
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चंडीगढ़ यूटी प्रशासन ने मंगलवार को मोटर वाहन एग्रीगेटर नियम-2025 की अधिसूचना जारी करते हुए कैब सेवाओं से जुड़ी कई अहम नीतियों में बदलाव किया है। 
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अब यदि कोई सवारी कैब रद्द करती है तो एग्रीगेटर कंपनी 10 फीसदी से ज्यादा जुर्माना नहीं वसूल सकेगी। यह भी तय हो गया है कि किराए का 80 फीसदी हिस्सा सीधा ड्राइवर को मिलेगा। 'डेड किलोमीटर' यानी खाली चलने पर कंपनियां ग्राहकों से अतिरिक्त किराया नहीं ले सकेंगी। साथ ही कंपनी को ट्राइसिटी में अपना दफ्तर खोलना होगा।

न्यूनतम 3 किमी का किराया देना होगा

अगर किसी ने कैब ली है तो उन्हें न्यूनतम 3 किमी का किराया देना होगा, ताकि ड्राइवर को नुकसान न हो। कोई भी एग्रीगेटर कंपनी प्रशासन द्वारा तय टैक्सी किराए से अधिक नहीं वसूल सकती। न्यूनतम किराया 3 किलोमीटर के लिए लागू होगा, जिसके बाद किलोमीटर के हिसाब से शुल्क लिया जाएगा हालांकि प्रशासन को सूचित कर वे 20 फीसदी तक कम किराया तय कर सकते हैं। यदि सवारी 3 किलोमीटर से कम दूरी की है तो यात्रियों से डेड माइलेज का किराया नहीं लिया जाएगा। किराया केवल यात्रा के वास्तविक दूरी के अनुसार लिया जाएगा। साथ ही, यदि ड्राइवर बुकिंग स्वीकार करने के बाद बिना किसी वैध कारण के यात्रा रद्द करता है, तो उस पर कुल किराये का 10 फीसदी (अधिकतम 100 रुपये) का जुर्माना लगाया जाएगा।

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ड्राइवर ने रूट बदला तो कंपनी कंट्रोल रूम को करेगी सूचित

नए नियमों के मुताबिक यह सुनिश्चित करना अनिवार्य होगा कि ड्राइवर वही रूट अपनाए जो ऐप पर तय किया गया है। अगर ड्राइवर तय रूट से हटता है तो ऐप के जरिए यह गलती तुरंत कंट्रोल रूम को सूचित की जाएगी और ड्राइवर से उसी समय संपर्क कर लिया जाएगा। इसके अलावा, प्रत्येक सवारी पर कम से कम 80 फीसदी राशि ड्राइवर को देनी होगी, बाकी एग्रीगेटर को जाएगी। इसके अलावा प्रशासन अतिरिक्त 2 फीसदी राशि राज्य निधि के लिए वसूल सकता है, जिसका उपयोग ट्रैफिक और प्रदूषण कम करने संबंधी कार्यक्रमों में किया जाएगा।

हर राइड से पहले ड्राइवर के पहचान की करनी होगी पुष्टि

ऐप पर एक ऐसा मैकेनिज्म भी अनिवार्य किया गया है जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि जो ड्राइवर यात्रा करवा रहा है, वह वही है जिसे ऐप पर रजिस्टर किया गया था। हर बार ट्रिप शुरू करने से पहले उसकी पहचान की पुष्टि करनी होगी। सरकार ने यह भी निर्देश दिया है कि एग्रीगेटर समय-समय पर गाड़ियों की चेकिंग करें और उनके पास अधिकृत कर्मचारी हों जो ऐसा कर सकें।

एप कंपनियों पर कसा शिकंजा

1. ड्राइवर के पास वैध पहचान पत्र जैसे आधार, पैन, या पासपोर्ट होना चाहिए
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2. कम से कम 2 साल की वैधता वाला ड्राइविंग लाइसेंस होना चाहिए
3. एग्रीगेटर द्वारा आयोजित 15 दिन का ऑन-बोर्डिंग प्रशिक्षण और वार्षिक रिफ्रेशर प्रशिक्षण प्राप्त करना होगा
4. पिछले 3 वर्षों में कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं होना चाहिए और उन्हें पूर्ण चिकित्सा जांच से गुजरना होगा
5. ड्राइवरों के लिए 6 लाख रुपये का स्वास्थ्य बीमा और 10 लाख रुपये का टर्म बीमा अनिवार्य होगा, जो सालाना 5 फीसदी की दर से बढ़ेगा
6. ड्राइवरों को कैलेंडर दिवस में अधिकतम 12 घंटे तक लॉग इन रहने की अनुमति होगी
7. कंपनी के पास भारत में एक पंजीकृत कार्यालय और चंडीगढ़ या ट्राइसिटी में कार्यालय होना चाहिए।
8. ड्राइवर का ड्राइविंग लाइसेंस वाहन के पीछे की सीट पर प्रदर्शित होना चाहिए ताकि यात्री उसे देख सकें
9. वाहनों में अग्निशामक यंत्र और चाइल्ड लॉक होना चाहिए
10. सभी वाहनों में ट्रैकिंग डिवाइस और आपातकालीन अलर्ट सिस्टम लगा होना चाहिए
 
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