चंडीगढ़। पीजीआई में एक व्यक्ति ने अपनी पत्नी फरीदा को 17 नवंबर को गंभीर हालत में इमरजेंसी में दाखिल कराया। फरीदा ने 19 दिसंबर को इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। फरीदा के पति रजा ने रोने की एक्टिंग की और कुछ देर बाद वहां से गायब हो गया। पीजीआई के डाक्टर व सुरक्षा कर्मी उसे ढूंढते रहे, लेकिन वह नहीं मिला। उसके बाद पीजीआई डाक्टरों ने कार्ड में लिखे मोबाइल नंबर और एड्रेस की जांच की तो वह भी फर्जी निकला। रजा ने अपने घर के पते में बिहार के एक गांव का लिखवाया था। पीजीआई के डाक्टरों ने इस बारे में पुलिस को सूचना दी और फरीदा के शव को पीजीआई की मोर्चरी में रखवा दिया।
पुलिस ने भी इस बारे में छानबीन शुरू की। जगह-जगह अखबारों में विज्ञापन भी दिए, लेकिन रजा का पता नहीं चल सका। उसके बाद पुलिस ने शव का अंतिम संस्कार करने का फैसला लिया। पुलिस ने आल इंडिया सेवा समिति से संपर्क किया और फरीदा के शव का अंतिम संस्कार करने को कहा। समिति के सेवादार मदनलाल वशिष्ठ ने बताया कि लड़की के नाम से पता चल रहा था कि वह मुस्लिम है, इसलिए उसे मुस्लिम रीति-रिवाज से सेक्टर-25 में दफनाया गया है। मदनलाल ने बताया कि वे पिछले कई सालों से लावारिस लाशों का अंतिम संस्कार कर रहे हैं, लेकिन उन्हें इस बात का दुख था कि कोई कैसे अपने को लावारिस छोड़ सकता है।