अपैरल हाउस में आयोजित कार्यशाल में सीएम खट्टर
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पंजाब में सीपीएस की नियुक्तियां रद्द होने के बाद हरियाणा में सीपीएस बनने का विधायकों का सपना पूरा होता नहीं दिख रहा। मंत्रिमंडल विस्तार के बाद सरकार तैयारी कर रही थी कि स्वर्ण जयंती समारोह की शुरूआत के बाद हरियाणा में भी कुछ विधायकों को सीपीएस का पद दे दिया जाए, लेकिन हाईकोर्ट के फैसले के बाद सरकार में इस विस्तार को लेकर मंथन शुरू हो गया है।
उधर वर्तमान में जो सीपीएस बने हैं पंजाब के फैसले के बाद उन पर भी खतरे की तलवार लटक गई है, क्योंकि हरियाणा का मामला भी हाईकोर्ट में विचाराधीन है और इसमें भी याचिकाकर्ता वही हैं। हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहरलाल ने सत्ता में आने के बाद 23 जुलाई 2015 को राज्य में चार मुख्य संसदीय सचिव बनाए थे।
हरियाणा में इस समय रादौर के विधायक श्याम सिंह राणा, असंध के विधायक बख्शीश सिंह, बड़खल की विधायक सीमा त्रिखा तथा हिसार के विधायक कमल गुप्ता को मुख्य संसदीय सचिव बनाया था। हालांकि हरियाणा सरकार की ओर से हाईकोर्ट में यह दलील दी जा चुकी है कि सरकार ने एक्ट में बदलाव करके चीफ पार्लियामेंट सेक्रेटरी को ऑफिस ऑफ प्रॉफिट के दायरे से बाहर रखा है।
सीपीएस को मंत्री या उप मंत्री का दर्जा नहीं हासिल है। वह खुद से कोई भी फैसले नहीं ले सकते। वह मंत्रियों की मद्द करने के लिए हैं। चूंकि वह अन्य विधायकों के मुकाबले अतिरिक्त काम करते हैं, इसलिए उन्हें जरा सा अतिरिक्त फायदा मिलता है। हरियाणा सरकार ने यह भी दलील दी कि वह जनहित में मंत्रियों की मदद के लिए नियुक्त किए गए हैं। यह भी कहा कि हरियाणा और पंजाब के बनने के बाद से वहां संसदीय सचिवों की नियुक्तयिां होती रही हैं।