फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

विभाजन के बाद जेटली के परिवार को उनकी बुआ ने अमृतसर में दी थी शरण

Sun, 25 Aug 2019 03:26 AM IST
दुष्यंत शर्मा अशोक नीर, अमृतसर
विज्ञापन
अरुण जेटली
विज्ञापन

पूर्व वित्त मंत्री अरुण जेटली का गुरु नगरी के साथ गहरा नाता था। देश विभाजन के बाद पाकिस्तान से पलायन करने के बाद उनके पिता महाराजा किशन जेटली अमृतसर में कुछ महीने रुके थे। पुराने शहर के बाजार फुल्लां वाला में जेटली के पिता की बहन का घर था। 

विज्ञापन


इसी घर में जेटली के पिता व उनके पांच भाइयों ने कुछ महीने गुजारे थे। इस घर में अब जेटली की बुआ के पोते नरेंद्र शर्मा रहते हैं। इसी बाजार में जेटली के मामा मदन त्रिखा का भी घर था। जहां अब उनके मामा की बहू रमा त्रिखा परिवार के साथ रहती है। 

जेटली का ननिहाल अमृतसर था, इसलिए उनके राजनीतिक और सामाजिक जीवन में अमृतसर की महत्वपूर्ण भूमिका रही। जब 1980 में अरुण जेटली की शादी कांग्रेस के दिग्गज नेता और जम्मू-कश्मीर के कई बार मंत्री रहे गिरधारी लाल डोगरा की बेटी संगीता उर्फ डॉली से हुई तो संगीता का संबंध भी अमृतसर के साथ जुड़ा हुआ था। 
विज्ञापन


जेटली के चाचा ससुर किशन चंद और दरबारी लाल की मजीठ मंडी में जड़ी बूटियों की दुकान थी। वह शहर के पुराने बाजार नमक मंडी की गली कंधारियां में रहते थे।

Trending Videos
विज्ञापन

राजनीतिक सफर का पहला और अंतिम चुनाव भी अमृतसर से लड़ा 

यह भाग्य की विडंबना ही थी कि जिस अमृतसर के साथ अरुण जेटली का दिल से लगाव था, वही अपने राजनीतिक सफर का पहला और अंतिम चुनाव भी अमृतसर संसदीय सीट से लड़ा। 2014 में अमृतसर सीट पर अरुण जेटली का मुकाबला कैप्टन अमरिंदर सिंह के साथ हुआ लेकिन जेटली चुनाव हार गए। उस समय भाजपा के दिग्गज नेताओं ने अरुण जेटली को राजस्थान की किसी भी सीट से चुनाव लड़ने के लिए कहा था। अमृतसर से लगाव होने के कारण जेटली ने यहीं से चुनाव लड़ने की इच्छा जताई थी। यह जेटली की दरियादिली ही थी कि अमृतसर से चुनाव हारने के बावजूद जेटली ने गुरुनगरी को भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम) की सौगात दी। श्री हरमंदिर साहिब तक जाने वाले विरासती मार्ग के निर्माण के लिए तत्कालीन पंजाब सरकार को 80 करोड़ की सहायता जारी की।  

सिद्धू को तीन बार जिताने में जेटली ने बहाया था पसीना
2004 में क्रिकेट से राजनीति में उतरे नवजोत सिद्धू को जिताने में जेटली ने कोई भी कसर नहीं छोड़ी थी। जेटली ने अमृतसर में न केवल सिद्धू के पक्ष में प्रचार किया, बल्कि सिद्धू को राजनीति के दांव-पेंच भी समझाए। सिद्धू जेटली को अपना राजनितिक गुरु कहते थे। 2006 में जब सिद्धू एक केस में अदालत द्वारा आरोपी घोषित किए गए तो जेटली ने ही सिद्धू को लोकसभा से इस्तीफा देने की सलाह दी थी। 2007 में लोकसभा उपचुनाव में भी सिद्धू की जीत में जेटली की बड़ी भूमिका थी। 2009 में सिद्धू अमृतसर को छोड़कर दिल्ली से चुनाव लड़ना चाहते थे लेकिन जेटली ने उन्हें अमृतसर से चुनाव लड़ने के लिए राजी किया। 2014 के लोकसभा चुनाव में सिद्धू ने जेटली के चुनाव का पूरी तरह  बहिष्कार कर दिया था। सिद्धू को मनाने के लिए जेटली ने उनको कई बार संदेश भेजे, लेकिन सिद्धू अमृतसर उन्हें वोट तक करने के लिए नहीं आए। इसके बावजूद उन्होंने सिद्धू को राज्यसभा का सांसद मनोनीत करने में अपनी सहमति दी थी। जेटली कहा करते थे कि सिद्धू से उनके संबंध राजनीति से प्रेरित नहीं हैं।

चुनाव प्रचार में कई नए मापदंड स्थापित कर गए थे जेटली 
जेटली अमृतसर से बेशक चुनाव हार गए लेकिन वे चुनावी राजनीति के कई उदाहरण स्थापित कर गए। चुनाव प्रचार के दौरान जेटली और कैप्टन अमरिंदर सिंह के बीच जब भी मुलाकात होती तो जेटली उनके स्वास्थ्य के बारे में पूछते थे। चुनाव प्रचार के दौरान जेटली ने कभी कैप्टन पर निजी आरोप की राजनीति नहीं की। लोकसभा चुनाव की टिकट मिलने के बाद जब जेटली दिल्ली से पहली बार अमृतसर हवाई अड्डे पहुंचे थे तो भाजपाइयों द्वारा निकाले गए जुलूस में गुब्बारे फटने से जेटली बाल-बाल बच गए थे। कई भाजपा कार्यकर्ताओं के हाथ-मुंह झुलस गए थे। जेटली सभी भाजपा कार्यकर्ताओं के घर गए थे।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें