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किडनी ट्रांसप्लांट के बाद जैसा डॉक्टर बोलें वैसा करो, जिंदगी चलेगी नहीं, रफ्तार भरेगी : सुखदेव

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चंडीगढ़। मैंने 37 साल पहले पीजीआई में किडनी ट्रांसप्लांट कराया था। सच कहूं जब किडनी खराब हुई थी तो कुछ समय के लिए परेशानी झेलनी पड़ी थी। लेकिन किडनी ट्रांसप्लांट के बाद आज की डेट तक मुझे कभी ये याद नहीं आया कि मेरी स्थिति बिगड़ी हो। ट्रांसप्लांट के बाद 72 साल की उम्र में भी अगर मेरी तरह फिट रहना है तो बस अपने डॉक्टर की बात गंभीरता से मानिए। वह जैसा कहें बिल्कुल वैसा ही कीजिए। फिर जिंदगी चलेगी नहीं रफ्तार भरेगी। यह कहना है पंजाब के सुखदेव का। वह पीजीआई में किडनी ट्रांसप्लांट के 50 वर्ष पूरे होने पर आयोजित कार्यक्रम में बतौर अतिथि मौजूद थे। इस अवसर पर पीजीआई प्रशासन ने संस्थान में किडनी ट्रांसप्लांट कराने वाले सबसे ज्यादा और सबसे कम उम्र के लोगों को सम्मानित किया। उनमें से एक सुखदेव भी थे। पीजीआई निदेशक प्रो. विवेक लाल ने बताया कि संस्थान में 21 जून 1973 को डॉ. आरवीएस यादव और डॉ. केएस चुघ ने पहला किडनी ट्रांसप्लांट सफलतापूर्वक किया था। अब तक जीवित और मृतक दोनों सहित 4700 से अधिक किडनी ट्रांसप्लांट किया जा चुका है। रीनल ट्रांसप्लांट सर्जरी विभाग की ओर से नेशनल नर्सिंग इंस्टीट्यूट के सभागार में आयोजित कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि राष्ट्रीय अंग और ऊतक प्रत्यारोपण संगठन (नोटो) के निदेशक डॉ. अनिल कुमार मौजूद थे। उन्होंने पीजीआई के अंगदान और ट्रांसप्लांट के क्षेत्र में किए जा रहे कार्य की सराहना की। उन्होंने बताया कि अंगदान को प्रोत्साहित करने के लिए सरकार ने दाता को 42 दिन का अवकाश देने की स्वीकृति दे दी है। इस अवसर पर पीजीआई में किडनी ट्रांसप्लांट के अग्रदूत माने जाने वाले पद्मश्री प्रो. मुकुट मिंज, प्रो. विनय सखूजा और प्रो. आर.के. सूरी भी उपस्थित थे।
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उपलब्धियों का क्रम जारी है
पीजीआई रीनल ट्रांसप्लांट सर्जरी के प्रमुख प्रो. आशीष शर्मा ने बताया कि 4700 किडनी ट्रांसप्लांट के साथ ही 2011 में कार्डियक डेथ के बाद ट्रांसप्लांट करने वाला पहला सार्वजनिक क्षेत्र का अस्पताल बन गया है। अब तक कार्डियक डेथ डोनर्स से 27 रीनल ट्रांसप्लांट किए जा चुके हैं। 2014 में शुरू किए गए अग्नाशय और गुर्दा प्रत्यारोपण एक साथ (एसपीकेटी) में भी अब तक 40 ट्रांसप्लांट सफलतापूर्वक किए जा चुके हैं। नई उपलब्धियों में एक साथ लिवर किडनी ट्रांसप्लांट (एसएलकेटी) है, जिसमें अब तक तीन मामले सफलतापूर्वक किए जा चुके हैं।

क्या बोले प्राप्तकर्ता

ऋषिकेश की पूनम बोलीं- पति ने दे दिया तलाक, लेकिन हिम्मत नहीं हारी
कार्यक्रम में मौजूद ऋषिकेश की 43 साल की पूनम ने बताया- ‘किडनी खराब होने के बाद पति ने उन्हें तलाक दे दिया था। 2010 में अचानक किडनी खराब हो गई। 2015 में पति ने तलाक दे दिया। लेकिन मैंने हिम्मत नहीं हारी। आठ साल तक डायलिसिस पर रही। 2018 में पीजीआई में एक 11 महीने के बच्चे से मिली दो किडनी मुझे ट्रांसप्लांट की गई। इसके बाद पति ने मुझसे सुलह करने की कोशिश की, लेकिन मैंने मना कर दिया। अब मैं अपने दम पर अपना वाटर राफ्टिंग का काम संभाल रही हूं। कभी कभी दो दिन लगातार काम करना पड़ता है लेकिन मैं थकती नहीं। इसका मुख्य कारण मेरा संतुलित जीवनचर्या है।’
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कर्नल भूपेंद्र सिंह बोले- मुझे कोई बीमार कहे तो बुरा लगता है
चंडीगढ़ के कर्नल भूपेंद्र सिंह की किडनी खराब हुई तो उन्होंने पीजीआई में इलाज शुरू कराया। दो साल बाद उनका किडनी ट्रांसप्लांट हुआ। भूपेन्द्र का कहना है कि वे आज भी प्रतिदिन दो से तीन घंटे गोल्फ खेलते हैं। अगर कोई बीमार कह दे तो उन्हें गुस्सा आ जाता है। उन्होंने कहा, ‘जब किडनी खराब थी, तब मैं बीमार था। अब तो मेरे पास मेरी किडनी है फिर मैं बीमार क्यों समझा जा रहा हूं। ट्रांसप्लांट के बाद सामान्य जीवन जीने के लिए खुद को इतना व्यस्त रखिए कि सोचने का समय ही न बचे कि आप बीमार हैं। भूपेन्द्र ने बताया कि जब मैं जब खाली महसूस करता हूं तक अपनी पत्नी के पसंद का खाना बनाता हूं।’

डाॅक्टर बनने का सपना करूंगी सच
चंडीगढ़ की ही 29 साल की शालिनी ने बताया कि वह डाॅक्टर बनना चाहती हैं। 2017 में जब किडनी खराब हुई तक पीएमटी क्लियर किया था, लेकिन बीच में पढ़ाई रोकनी पड़ी। शालिनी ने बताया, ‘2022 में पीजीआई में ही मेरा किडनी ट्रांसप्लांट हुआ। अब मैं बिल्कुल ठीक हूं। मस्त रहती हूं। कभी खुद पर यह बात हावी नहीं होने देती कि मेरी किडनी ट्रांसप्लांट हुई है। मेरे जैसे जितने लोग हैं उन्हें भी मेरी जैसी सोच रखनी चाहिए, जिंदगी आसान हो जाएगी।’

बच्चे को पीजीआई ने दिया नवजीवन
पीजीआई में सबसे कम उम्र तीन साल में किडनी ट्रांसप्लांट कराने वाले रवजोत के माता-पिता का कहना है कि अंगदान से उनके बेटे की जान बची है। रवजोत की माता ने बताया, ‘तीन साल की उम्र में किडनी ट्रांसप्लांट हुआ था। अब वह तीन साल का हो गया है। उन्होंने बताया कि उसकी देखभाल को लेकर बहुत सचेत रहती हूं। लेकिन उसे खेलने कूदने से मना नहीं करती। डॉक्टर की सलाह का शत प्रतिशत पालन करती हूं।’
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