पीयू का संचालन सीनेट व सिंडिकेट के जरिए होता है। हर फैसले यही बॉडी लेती हैं लेकिन दो दशक से सीनेट व सिंडिकेट में राजनीतिक गतिविधियां अधिक हो गईं। जिसको बहुमत वही प्रस्ताव पास करवा सकता है। ऐसे में कुछ फैसले ठीक भी हुए तो कई गलत भी। इस प्रक्रिया का विरोध सीनेट में भाजपा के नेताओं ने किया। केंद्रीय मंत्रियों व सांसदों ने भी देखा। उसके बाद वह कह गए कि सीनेट के रिफॉर्म की जरूरत है।
पूर्व में भी यह बात चली लेकिन परवान नहीं चढ़ पाई थी। सूत्रों का कहना है कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति ने इन बातों को बल दिया और उसमें गवर्नेंस रिफॉर्म का बिंदु शामिल कर दिया गया। चारों तरफ बात फैली है कि सिंडिकेट व सीनेट खत्म हो जाएगी और उसकी जगह बोर्ड ऑफ गवर्नेंस लागू होगा। इन बातों को यूजीसी के हाल ही में जारी पत्र ने बल दिया है। सूत्रों का कहना है कि अब पीयू में सीनेट व सिंडिकेट नहीं रहेगी।
अब सीनेट चुनाव की संभावनाएं खत्म
यूजीसी के शासन सुधार के पत्र आने के बाद अब पीयू को और बल मिल गया है। सूत्रों का कहना है कि अभी तक पीयू के अधिकारी संशय में थे कि हो सकता है कि सीनेट के चुनाव करवाने पड़ जाएं लेकिन यूजीसी के पत्र के बाद अधिकारियों ने राहत की सांस ली है। सूत्रों का कहना है कि अब सीनेट चुनाव की संभावनाएं नहीं बची हैं। हालांकि हाईकोर्ट का रास्ता खुला है। वहां से कोई आदेश आए तो कुछ बात बन सकती है।
एक सीनेटर थाम सकता है भाजपा का दामन
पीयू के एक प्रमुख सीनेटर भाजपा का दामन थाम सकते हैं। इसकी कवायद शुरू हो गई है। कई नेताओं से भी सिफारिशें करवाई जा रही हैं। जानकारों का कहना है कि सीनेट के चुनाव की संभावनाएं कम होने के बाद यह बात सार्वजनिक हो गई। वहीं दूसरी ओर भाजपा के खेमे में भी भूचाल आ गया। उन्होंने कहा है कि यदि किसी दूसरे दल के सीनेटर को भाजपा में जगह दी गई तो वह खुद भाजपा छोड़ देंगे। हालांकि अभी पीयू में यह चर्चा तेजी से चल रही है लेकिन इस पर फाइनल निर्णय नहीं हुआ है।