चंडीगढ़। जिला उपभोक्ता आयोग ने सिम पोर्ट करवाने के बाद मजबूरी के चलते बिल न भरने पर नंबर बंद कर देने और नंबर फिर से चालू करने के लिए एक लाख रुपये की मांग करने के मामले पर सुनवाई करते हुए रिलायंस जियो इन्फोकॉम कंपनी को सेवा में कोताही बरतने का दोषी करार दिया है। इसके साथ आयोग ने जियो को शिकायतकर्ता का नंबर फिर से सक्रिय करने के साथ एक लाख रुपये मानसिक उत्पीड़न के लिए रूप में देने के आदेश दिए हैं।
क्या था मामला
सेक्टर-35 निवासी सुरप्रीत कौर ने जिला उपभोक्ता आयोग को दी याचिका में बताया कि वह करीब 6 से 7 साल तक भारती एयरटेल कंपनी के ग्राहक थी। इसके बाद उन्होंने अपना नंबर जियो में पोर्ट करवा लिया। साल 2020 के अगस्त-सितंबर माह में शिकायतकर्ता को छोड़कर परिवार के अन्य सदस्य कोविड से पीड़ित थे। वहीं, कंपनी की ओर से साल 2021 में जनवरी से फरवरी माह का अवधि के लिए 334.79 रुपये का बिल भेजा गया, जिसका भुगतान 20 दिन के भीतर करना था। शिकायतकर्ता ने बताया कि मार्च 2021 में दुबई की यात्रा करनी थी। इस कारण वह बिल का भुगतान करना भूल गई। ऑनलाइन बिल का भुगतान करने का प्रयास किया लेकिन किसी कारण से बिल जमा नहीं हो सका। विदेश में वह भारत का नंबर प्रयोग में नहीं ला सकी। वापस भारत आने पर पता चला गया कि नंबर निष्क्रिय कर दिया गया। नंबर फिर से सक्रिय करने के लिए मेल के माध्यम से शिकायतकर्ता से एक लाख रुपये की मांग की गई। मामले की सुनवाई करते हुए उपभोक्ता आयोग ने जियो कंपनी को शिकायतकर्ता का नंबर फिर से सक्रिय करने के साथ मानसिक उत्पीड़न के लिए एक लाख रुपये देने के आदेश दिए।