चंडीगढ़। शहर में चार साल बाद कलेक्टर रेट बढ़ने जा रहे हैं। कुछ इलाकों में यह बढ़ोतरी 10 फीसदी तक होगी, जबकि कुछ स्थानों पर दरों में 80 से 90 फीसदी तक इजाफा होने की संभावना है। शहर के किसी भी एरिया का कलेक्टर रेट कम नहीं होने वाला है। नए कलेक्टर रेट 1 अप्रैल से लागू होंगे।
मंगलवार को कलेक्टर रेट तय करने के लिए गठित समिति के साथ डीसी निशांत कुमार यादव की बैठक हुई। बैठक में भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास और पुनर्स्थापन में उचित मुआवजा और पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम-2013 के प्रावधानों पर चर्चा की गई। समिति ने शहर का सर्वे कर लिया है। मार्केट के अनुसार कुछ इलाकों का कलेक्टर रेट 10 से 20 फीसदी तो कहीं 80 से 90 फीसदी तक बढ़ेगा। सिर्फ आवासीय ही नहीं, बल्कि व्यावसायिक संपत्तियों का कलेक्टर रेट भी बढ़ेगा। माना जा रहा है कि 1 से 12 तक के सेक्टरों का कलेक्टर रेट सबसे ज्यादा बढ़ेगा। यहां 80 से 90 फीसदी तक की बढ़ोतरी हो सकती है। सर्वे के बाद संशोधित कलेक्टर दरों का मसौदा तैयार किया जा रहा है, जिसे 5 मार्च तक सार्वजनिक किया जाएगा और आम जनता से सुझाव मांगे जाएंगे। जनता 20 मार्च तक अपने सुझाव डीसी ऑफिस में जमा कर सकती है। समिति इन सभी सुझावों की समीक्षा करेगी और अंतिम संशोधित कलेक्टर दरों को 25 मार्च तक प्रकाशित करेगी। ये संशोधित दरें 1 अप्रैल से प्रभावी होंगी। डीसी के साथ हुई बैठक में एडीसी, एसडीएम, एईओ, तहसीलदार, जिला नगर योजनाकार, जिला कोषाधिकारी और गृह विभाग के प्रतिनिधियों सहित अन्य कई अधिकारी उपस्थित रहे।
2021 में 10 फीसदी घटा था व्यावसायिक संपत्तियों का कलेक्टर रेट
कलेक्टर रेट बढ़ेगा तो शहर में नई संपत्तियों का पंजीकरण महंगा हो जाएगा। इससे पहले चंडीगढ़ प्रशासन ने अप्रैल 2021 में कलेक्टर रेट में संशोधन किया था। तब व्यावसायिक संपत्तियों की दरों में 10 और औद्योगिक भूखंडों की दरों में 5 प्रतिशत की कटौती की गई थी। इस दौरान कृषि योग्य भूमि की दरों में 10 प्रतिशत की वृद्धि की गई थी। रिहायशी संपत्तियों की दरों में किसी तरह की वृद्धि नहीं हुई थी। एक अधिकारी ने बताया कि पंजीकृत सेल डीड के विश्लेषण के साथ-साथ बाजार और गांवों के सर्वेक्षण के बाद कलेक्टर दरों को संशोधित किया जा रहा है। कलेक्टर दर न्यूनतम संपत्ति मूल्य है, जिसके नीचे इसे सरकार के पास पंजीकृत नहीं किया जा सकता। कलेक्टर रेट पर स्टांप ड्यूटी भी चुकानी पड़ती है।