जनगणना-2011 को संपन्न हुए पांच साल बीत गए, लेकिन अब तक इसे पूरा कराने वाले कर्मचारियों को मेहनताना नहीं मिल पाया है। कर्मचारी अपने पैसे के लिए कई वर्षों से डीसी और जनगणना कार्यालय के चक्कर काट रहे हैं।
यूटी के 200 से अधिक कर्मचारियों की जनगणना में ड्यूटी लगी थी। प्रत्येक कर्मचारी को इसके लिए तीन हजार रुपये मिलने थे। पांच साल बीतने के बाद भी किसी कर्मचारी को एक पैसा भी नहीं मिला। कर्मचारियों का कहना है कि जब वह जनगणना कार्यालय जाते हैं तो फाइल डीसी कार्यालय में होने की बात कही जाती है।
जब डीसी कार्यालय पहुंचकर फाइल के बारे में पूछते हैं तो वह जनगणना कार्यालय का हवाला दे देते हैं। ऐसे में कोई भी सही बताने को तैयार नहीं हैं। इससे पहले चुनाव संबंधी ड्यूटी कर चुके ब्लॉक लेवल ऑफिसर (बीएलओ) के पैसे भी कई वर्षों तक फंसे रहे।
यूटी के कई शिक्षकों को चुनाव या सर्वे में बीएलओ नियुक्त किया जाता है। कार्य संपन्न होने के बाद बीएलओ पैसे के लिए दफ्तरों के चक्कर लगाते रह जाते हैं। हालत यह होती है कि कोई भी कर्मचारी अधिकारियों के दबाव के कारण आवाज तक नहीं उठा पाता है।
यूटी कैडर एजुकेशनल इंप्लाइज यूनियन के प्रधान स्वर्ण सिंह कंबोज ने बताया कि शिक्षक और दूसरे कर्मचारी काम छोड़कर जनगणना व चुनाव संबंधी ड्यूटी देते हैं।
उसके बाद भी उनका मेहनताना नहीं दिया जाता। कंबोज ने कहा कि यदि प्रशासन जल्द सभी कर्मचारियों के पैसे रिलीज नहीं करता तो वह कोई दूसरा कदम उठाएंगे।