लालड़ू। बरसाती नाले में बहे किशोर का शव 44 घंटे बाद दो किलोमीटर दूर पेनेशिया फैक्टरी के पीछे नदी के पास झाड़ियों से बरामद हुआ है। पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम करवाकर परिजनों को सौंप दिया है। पुलिस ने बताया कि दो दिन पहले से गांव चौंदहेडी के निकट बरसाती नाले को पार करते पंकज का पैर फिसल गया था। इसके बाद वह तेज बहाव में बहकर लापता हो गया था। कड़ी मशक्कत के बाद शव शुक्रवार को करीब 44 घंटे बाद घटनास्थल से करीब दो किलोमीटर की दूरी पर स्थित पनेशिया फैक्टरी के पिछले गेट के पास झाड़ियों से मिला। इसकी जानकारी फैक्टरी वर्कर की ओर से लैहली चौकी को दी गई थी। लैहली पुलिस ने मौके पर पहुंचकर शव को बाहर निकाला और परिजनों को बुलाकर शव की पहचान करवाई। मृतक किशोर ने स्कूल की वर्दी और जूते पहने हुए थे। पुलिस ने मृतक के पिता मुकेश के बयान पर 174 के तहत कार्रवाई कर शव का सरकारी अस्पताल डेराबस्सी से पोस्टमार्टम करवाकर परिजनों को सौंप दिया है।
स्कूल से लौट रहा था 14 वर्षीय पंकज
दरअसल, 14 वर्षीय किशोर पंकज गांव दप्पर के सरकारी हाई स्कूल में आठवीं कक्षा का छात्र था। बुधवार को तेज बरसात होने से स्कूल कैंपस में पानी भरने और बच्चों के कपड़े गीले होने पर स्कूल से विद्यार्थियों की छुट्टी कर दी गई थी। इसके बाद वह अपने सहपाठियों के साथ दप्पर में अपने दोस्त के घर बैग रखकर कच्चे रास्ते से गांव चौंदहेडी गया था। रास्ते में पड़ने वाले बरसाती नाले में उस समय पानी का बहाव कम था लेकिन जब वे चौंदहेडी से वापस आए तो पानी का तेज बहाव हो गया था। जैसे ही वह नाले को पार करने लगा तो उसका पैर फिसल गया और वह पानी के तेज बहाव में बहता चला गया। वीरवार को ग्रामीणों और गोताखोर की मदद से पंकज को तलाशते रहे लेकिन सफलता नहीं मिली। मृतक का छोटा भाई भी सरकारी स्कूल दप्पर में 6वीं कक्षा में पढ़ता है।
दप्पर-चौंदहेडी कच्चे रास्ते पर काजवे बनाने की मांग
गांव दप्पर-चौंदहेडी के कच्चे रास्ते पर बरसाती नाले के तेज बहाव में 14 वर्षीय किशोर के बह जाने के बाद यहां काजवे न बनने को लेकर लोग रोष प्रकट करते नजर आए। लोगों ने बताया कि आसपास के करीब 10 गांवों का एकमात्र सरकारी हाई स्कूल दप्पर है। जहां पर पिछले कई दशकों से अन्य गावों से काफी सख्यां में विद्यार्थी शिक्षा ग्रहण करते आ रहे हैं। गांव चौंदहेडी के विद्यार्थी और फैक्टरी में कार्यरत वर्कर हाईवे का लंबा रास्ते से न जाकर इसी रास्ते से आ-जा रहे हैं। बरसात के मौसम को छोड़ ये रास्ता पूरा वर्ष सूखा रहता है। लेकिन बरसात के दिनों में पानी आने से समस्या खड़ी हो जाती है। लोगों ने कहा कि अगर यहां पिछली सरकारों की ओर से काजवे बनाया होता तो आज पंकज तेज पानी की भेंट ना चढ़ता। लोगों ने स्कूल में शिक्षा ग्रहण करने जाने वाले बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए मौजूदा सरकार से यहां काजवे बनाने की मांग की है।