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एयरोट्रोपोलिस विस्तार : आठ गांवों में जमीन की खरीद-फरोख्त बंद

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मोहाली। पंजाब सरकार के सबसे अहम प्रोजेक्ट एयरोट्रोपोलिस प्रोजेक्ट के विस्तार के लिए गमाडा ने आठ गांवों की कुल 3553 एकड़ जमीन के अधिग्रहण का नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। यह नोटिफिकेशन मकान और शहरी विकास विभाग के प्रमुख सचिव विकास गर्ग के हस्ताक्षरों के तहत जारी हुआ है। नए आदेशों के अनुसार गमाडा के अधिकारी और कर्मचारी अब संबंधित जमीनों पर किसी भी प्रकार का सर्वेक्षण करने के लिए अधिकृत होंगे। नोटिफिकेशन जारी होने के बाद इन क्षेत्रों में जमीन की खरीद-फरोख्त पूरी तरह बंद कर दी गई है। प्रभावित किसानों को अपनी आपत्तियां 60 दिन के भीतर गमाडा कार्यालय में जमा करवाने को कहा गया है।
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अधिग्रहण की कार्रवाई पूरी होने के बाद आठ में से सात गांवों बाकरपुर, बड़ी, कुरड़ी, मटरां, सियाऊ, किशनपुरा और पत्तो में खेती योग्य जमीन लगभग समाप्त हो जाएगी। गमाडा पहले ही एयरोट्रोपोलिस के लिए ए से डी पॉकेट बना चुका है, लेकिन इन इलाकों में अभी भी विकास कार्य लंबित हैं। किसानों को मिलने वाले कई लाभ भी जारी नहीं हुए हैं। अब विस्तार के तहत ई से जे पॉकेट के लिए जमीन अधिग्रहित की जा रही है, जिसे आगे चलकर रिहायशी और व्यावसायिक विकास के लिए इस्तेमाल किया जाएगा। इस बड़े पैमाने पर भूमि अधिग्रहण ने प्रभावित गांवों में चर्चा और चिंता दोनों बढ़ा दी है। किसान अब अपने हितों को ध्यान में रखते हुए आपत्तियां तैयार कर रहे हैं।



रिहायशी और व्यापारिक गतिविधियों के लिए इस्तेमाल होगी जमीन
मोहाली में एयरोट्रोपोलिस प्रोजेक्ट के विस्तार के तहत अधिग्रहित की जा रही जमीन को आगे चलकर रिहायशी और व्यापारिक विकास के लिए उपयोग किया जाएगा। गमाडा ने आठ गांवों की भूमि को शामिल करते हुए नए पॉकेट विकसित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। अधिकारियों के अनुसार, इस क्षेत्र को आधुनिक आवासीय सुविधाओं, वाणिज्यिक केंद्रों और बुनियादी ढांचे के साथ एक योजनाबद्ध शहरी जोन के रूप में विकसित किया जाएगा।
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पुआधी मंच हाईकोर्ट में दायर करेगा जनहित याचिका
पुआधी मंच मोहाली ने आठ गांवों की 3553 एकड़ जमीन के अधिग्रहण को लेकर गमाडा की जल्दबाज़ी पर सवाल उठाए हैं। मंच के नेताओं ने बताया कि वे प्रभावित गांवों के किसानों के साथ बैठक कर जल्द ही पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर करेंगे। मंच के सदस्य परमदीप सिंह बैदवान ने कहा कि गमाडा ने सामाजिक प्रभाव आकलन मात्र दस दिनों में पूरा कर लिया, जो केवल खानापूर्ति जैसा लगता है। उन्होंने कहा कि किसानों की समस्याएं सुलझाए बिना जमीन अधिग्रहण करना उनके साथ सीधा अन्याय है।
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