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किसान विरोधी विधेयकों के विरोध में उतरे वकील, कहा- देश में किसान पहले ही कर्ज में डूबे, इन विधेयकों से तो फसल के सही दाम भी नहीं मिलेंगे

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चंडीगढ़। लोकसभा में तीन नए कृषि विधेयकों के पारित होने से पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ के किसानों में काफी रोष है। अब वकील भी इन विधेयकों के विरोध में उतरे हैं। वकीलों का कहना है कि इन विधेयकों से किसानों को उनकी फसल के सही दाम नहीं मिल पाएंगे। किसान पहले ही कर्ज में डूबे हुए हैं। पूरे देश में 50 प्रतिशत किसान कृषि पर निर्भर करते हैं।
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जानकारी के अनुसार लोकसभा में कृषि उपज वाणिज्य एवं व्यापार (संवर्धन एवं सुविधा) 2020, आवश्यक वस्तु संशोधन अधिनियम 2020, मूल्य आश्वासन और कृषि सेवाओं पर किसान (सशक्तीकरण और सुरक्षा समझौता) अध्यादेश 2020 तीन विधेयक पारित हुए हैं। वकीलों ने किसानों का समर्थन करते हुए कहा कि इन विधेयकों से छोटे किसान सड़कों पर आ जाएंगे और इससे बड़े उद्योगपतियों को फायदा मिलेगा। इससे न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) खत्म हो जाएगा। राज्यों की मंडी धीरे-धीरे अपना अस्तित्व खो देगी।
इन विधेयकों से गिरेगा उत्पादन
यह विधेयक किसानों के बिल्कुल खिलाफ है। सरकार की जो निजीकरण की पॉलिसी चल रही है, यह विधेयक उसकी तरफ पहला कदम है। इस विधेयक को लाकर सरकार अपने निजीकरण के एजेंडे को बढ़ावा दे रही है। पंजाब-हरियाणा के किसानों को एमएसपी से फायदा मिलता है। इन विधेयक से वह मिलना बंद हो जाएगा। इससे उत्पादन गिरेगा और अर्थव्यवस्था तहस-नहस हो जाएगी। - वकील प्रेम सिंह भंगू, प्रेजिडेंट ऑल इंडिया किसान फेडरेशन
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किसानों को मंडियों से किया जा रहा दूर
सरकार ने बिल तो पास कर दिया है, लेकिन अभी इस पर काफी काम करने की जरुरत है। किसानों को मंडियों से जोड़ने के बजाय उन्हें इससे दूर किया जा रहा है। देश के किसानों के पास कोई भी साधन नहीं है। इस कारण वे आत्महत्या कर रहे हैं। इन विधायकों में ऑनलाइन मार्केट को महत्व दिया गया है। कुछ किसानों के अशिक्षित होने के कारण उन्हें चीजों को समझने में परेशानी होगी। -गीतांजलि वाधवा, वकील जिला अदालत
पूंजीपतियों को होगा फायदा
यह विधेयक पास करने से पहले देश के किसानों से प्रतिक्रिया लेना बहुत जरूरी था। किसान दूसरे राज्य में जाकर अपनी फसल कैसे बेचेगा। सरकार आत्मनिर्भर का एजेंडा चलाकर जो बदलाव कर रही है, उसका सीधा फायदा पूंजीपतियों को जा रहा है। किसान अपनी फसल को लेकर चिंता में रहते हैं। वह बिल्कुल साधारण जीवन व्यतीत कर रहे हैं। उन्हें ऑनलाइन सिस्टम के बारे में कोई जानकारी नहीं है। -रोशनी राय, वकील जिला अदालत
निजी कंपनियां करेंगी कीमत तय
सरकार कृषि सुधारों की दिशा में इन विधायकों को ‘वन नेशन वन मार्केट’ के रूप में पेश करने की कोशिश कर रही है। इन किसान विधेयकों के अनुसार निजी कंपनियां किसानों की फसलों की कीमत तय करेंगी। मंडिया खत्म होने से किसानों को एमएसपी कीमत नहीं मिलेगी। ऐसे विधायकों से निजी कंपनियों को किसानों के शोषण का जरिया मिल जाएगा और ऐसे में किसान मजदूर बन जाएगा। -सुप्रीत कौर बराड़, वकील जिला अदालत
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