रेडक्रॉस में सदस्यों के साथ भेदभाव के मामले में एडवाइजर मनोज परिदा ने भी जांच कराने का फैसला लिया है। एडवाइजर ने कहा कि मामला संज्ञान में आया है। जांच के बाद आगे की कार्रवाई करेंगे। इससे पूर्व सदस्यों ने प्रशासक वीपी सिंह बदनौर सहित एडवाइजर, डीसी मंदीप सिंह बराड़ व राष्ट्रपति रामनाथ कोविद को पत्र लिखकर अपने साथ हुए भेदभाव की जानकारी दी थी।
इस मामले को अमर उजाला ने 24 अगस्त के अंक में प्राथमिकता से उठाया था। रेडक्रॉस के साथ मिलकर कार्य कर रहे स्वरमनी फाउंडेशन के सदस्यों ने शिकायत पत्र में लिखा था कि उन्हें रसोई में घुसने नहीं दिया जाता है। सदस्य अपने हाथ से पानी न ले सकें, इसलिए रसोई में ताला लगा दिया गया है।
सदस्यों ने कहा कि पिछले आठ साल से रेडक्रॉस के साथ जुड़े हैं। जब जरूरत हुई नि:स्वार्थ भाव से समाज सेवा का कार्य किया। कोरोना काल मे जब रेडक्रॉस सोसायटी के कर्मचारियों ने कोरोना संक्रमित शव उठाने से मना कर दिया था, तब हमारे 11 साथियों ने मिलकर इस कार्य का अंजाम दिया। अब हालात यह हैं कि रेडक्रॉस में ही भेदभाव किया जा रहा है।
कहा जाता है कि पीछे के दरवाजे से आओ, यहां से अन्य लोग अंदर आते हैं। बैठने के लिए हमारे पास जगह नहीं है। अछूतों की तरह हमारे साथ व्यवहार किया जा रहा है। जब आहत होकर काम छोड़ा तो रेडक्रॉस के नोडल ऑफिसर मोहनलाल ने सभी से कह दिया कि उन्हें कोरोना हो गया है। नोडल ऑफिसर बस लोगों को भ्रमित कर सच्चाई पर पर्दा डाल रहे हैं।
मामले की जानकारी मिली है। इस संबंध में विस्तृत जानकारी ले रहे हैं। पूरे मामले की छानबीन के बाद उचित कार्रवाई की जाएगी। - मनोज परिदा, एडवाइजर