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संवेदनहीनता : कोरोना काल में दूसरे रोगों के मरीजों से भेदभाव, बिना बताए अस्पताल से दी जा रही छुट्टी

Fri, 16 Apr 2021 02:28 AM IST
पंचकुला ब्‍यूरो वीणा तिवारी, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

  • कोरोना संक्रमण के कारण चंडीगढ़ के अस्पतालों में बंद है मरीजों का इलाज
  • लंबे इंतजार के बाद भर्ती किए जा रहे मरीज, बिना बताए कर रहे छुट्टी 
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अपनी बीमार मां के साथ संदीप। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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कोरोना संक्रमण के चलते चंडीगढ़ के अस्पतालों में सामान्य मरीजों का इलाज बंद है। पीजीआई इमरजेंसी में लकवा के दौरे के बाद पहुंचे पंजाब के एक मरीज को हजार मिन्नतों और घंटों इंतजार के बाद इलाज मिला, लेकिन बिना बताए छुट्टी दे दी गई।

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इसके अलावा ऐसे कई मामले सामने आए हैं कि लंबे इंतजार के बाद मरीज को भर्ती करने के साथ ही बिना बताए छुट्टी दे दी जा रही है। इस संदर्भ में पीजीआई प्रशासन का कहना है कि मरीजों का अधिक दबाव और कोरोना संक्रमण के खतरे को देखते हुए मरीज की स्थिति स्थिर (स्टेबल) होने पर छुट्टी दी जा रही है।

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13 अप्रैल को किया भर्ती, 15 को कह दिया-ले जाओ

पंजाब के मलोट निवासी संदीप अपनी मां रानी बाई को लेकर 13 अप्रैल की रात 10 बजे पीजीआई इमरजेंसी पहुंचे। रात 1.30 बजे उनकी मां को भर्ती किया गया। संदीप ने बताया कि उनकी मां को लकवा (पैरालाइज) का दौरा पड़ा था। डॉक्टर बार-बार यही कहते कि लाइन में लग जाओ और अपने नंबर का इंतजार करो, यहां मरीजों की कतार बहुत लंबी है। रात 1.30 बजे रानी बाई को भर्ती किया गया।

देखने के बाद डॉक्टर ने बताया कि डेढ़ लाख के 5 इंजेक्शन लगेंगे। संदीप ने तत्काल इंजेक्शन लाकर डॉक्टर को दिया। डॉक्टर ने उसमें से एक इंजेक्शन मरीज को लगा दिया और बाकी चार वायल संदीप को लौटा दिए। 14 अप्रैल को भी मरीज को कोई इलाज नहीं मिला। क्योंकि इमरजेंसी में कोई न्यूरोलॉजिस्ट उपलब्ध नहीं था।
 
15 अप्रैल की सुबह संदीप के हाथ में छुट्टी की पर्ची थमा दी गई। संदीप ने बताया कि उससे मरीज का कार्ड मांगा गया और थोड़ी देर बाद नर्सिंग ऑफिसर ने आकर उसे छुट्टी का कागज दे दिया। नर्सिंग ऑफिसर ने बताया कि यहां इससे ज्यादा देर तक मरीज को भर्ती नहीं किया जा सकता। जहां से लेकर आए हैं, वही जाकर बाकी इंजेक्शन लगवा लेना।
 
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बेड की जगह स्ट्रेचर पर इलाज

संदीप ने बताया कि भर्ती करने के बाद उनकी मां को स्ट्रेचर पर लिटा दिया गया। इमरजेंसी में केवल कुछ बेड ही उपलब्ध हैं, जो भरे हैं, बाकी 100 से ज्यादा मरीजों को स्ट्रेचर पर ही भर्ती कर इलाज किया जा रहा था। इमरजेंसी में कोरोना संक्रमितों को सामान्य मरीजों के बीच भर्ती किया जा रहा है। ऐसी स्थिति बेहद खतरनाक है।
 
पीजीआई की इमरजेंसी और ट्रॉमा सेंटर में मौजूदा समय में मरीजों का दबाव कई गुना बढ़ गया है। ऐसी स्थिति में किसी भी गंभीर मरीज को भर्ती कर स्थिर होने के बाद ही छुट्टी दी जाती है। स्थिर होने के बाद भर्ती रखना खतरनाक साबित हो सकता है। क्योंकि अन्य जगहों से रेफर मरीज ही आते हैं, जिनसे कोरोना संक्रमण का खतरा बना रहता है।  - प्रो. अशोक कुमार, पीजीआई प्रवक्ता
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