पंजाब के गवर्नर एवं चंडीगढ़ के प्रशासक वीपी सिंह बदनौर ने अधिकारियों को कहा है कि ट्रैफिक लाइट्स पर इस तरह के कैमरे के साथ सिस्टम लगाना चाहिए जिससे अगर कोई ट्रैफिक सिग्नल तोड़ता है तो चालक के मोबाइल फोन पर तुरंत मैसेज आ जाए कि उनका चालान कट चुका है। बदनौर ने कहा कि सोमवार को आईजी उनसे मिलने आए थे उन्होंने यह सुझाव दिया था। शहर में एलईडी लाइट्स लगाने का जो काम शुरू हो रहा है उसमें यह सिस्टम भी लागू होना चाहिए। मंगलवार को नगर निगम में पार्षदों के दो दिवसीय प्रशिक्षण शिविर में प्रशासक ने मुख्य अतिथि के तौर पर हिस्सा लिया।
इस मौके पर बदनौर ने यह भी कहा कि वह चाहते हैं कि निजी स्कूलों से सरकारी स्कूल आगे निकलने चाहिए। प्राइवेट और सरकारी स्कूलों में प्रतियोगिता होनी चाहिए। एक विदेश की कंपनी से बात चल रही है जिसके तहत एक लाख छात्रों को टैब दिए जाएंगे। उन्होंने पार्षदों को कहा कि सीखने का मौका कभी छोड़ना नहीं चाहिए। यह मौका हर किसी को नहीं मिलता है।
चंडीगढ़ के प्रशासन ने कहा कि उन्हें शहर आए छह महीने हुए हैं ऐसे में पार्षदों के पास समस्याओं को दूर करने का ज्यादा अनुभव है। पार्षद उनके पास अपने आइडिया लेकर आ सकते हैं। उन्होंने शहर में बढ़ रही बंदरों और लावारिस कुत्तों की दिक्कत को भी उठाया। उन्होंने कहा कि मिलकर ही इसका हल निकाला जा सकता है। प्रशासक से पहले मेयर आशा जसवाल ने कहा कि यह प्रशिक्षण नगर निगम के इतिहास में पहली बार हो रहा है। प्रशासक भी पहली बार नगर निगम में आए हैं।
सफाई व्यवस्था दुरुस्त होने पर हैरान हुए गवर्नर
‘ट्रैफिक सिग्नल तोड़ने पर तुरंत मोबाइल पर आए मैसेज’
- फोटो : अमर उजाला
सफाई व्यवस्था दुरुस्त होने पर हैरान हुए गवर्नर
सेक्टर-17 की सफाई व्यवस्था दुरुस्त देखकर गवर्नर हैरान हो गए। प्रशासक वीपी सिंह बदनौर ने कहा कि इससे पहले जब वह सेक्टर-17 में आए थे तो सफाई व्यवस्था अच्छी नहीं थी। उन्होंने अधिकारियों से भी पूछा कि क्या गवर्नर की विजिट के कारण इतनी सफाई हुई है।
बिजली के निजीकरण के पक्ष में नहीं
प्रशासक बदनौर ने कहा कि वह बिजली के निजीकरण के पक्ष में नहीं हैं, लेकिन मोबाइल कंपनियों की तरह से बिजली के भी मल्टी लाइसेंस दिए जाने चाहिए। इस व्यवस्था में किसी भी कर्मचारी की नौकरी भी नहीं जानी चाहिए। उन्होंने अधिकारियों को कहा कि इस समय 17 से 19 प्रतिशत बिजली के लास हो रहे हैं उसे कम किया जाए।
नामांकन भरने के लिए दूसरा प्रस्तावक नहीं मिला
प्रशासक वीपी सिंह बदनौर ने कहा कि साल 1977 में अपना राजनीतिक सफर शुरू किया तो उस समय विधायक का चुनाव लड़ने के लिए नामांकन भरने के लिए दूसरा प्रस्तावक नहीं मिला था। एक दोस्त के सुझाव पर उन्होंने जनता पार्टी से टिकट के लिए आवेदन किया था, लेकिन इसके लिए 500 रुपये का शुल्क दिया था जो उस समय काफी ज्यादा था। नामांकन से एक दिन पहले ही उन्हें टिकट दिया उस समय वह एक कारपोरेट कंपनी में काम करते थे।