चंडीगढ़। धनास रिहैबिलिटेशन कॉलोनी में फायर फाइटिंग सिस्टम की कमी का मामला अब पंजाब के राज्यपाल व चंडीगढ़ के प्रशासक गुलाबचंद कटारिया के पास पहुंच गया है। वर्ष 2013 में बसाई गई इस कॉलोनी में हजारों परिवार रह रहे हैं लेकिन अब तक अग्निशमन व्यवस्था नहीं लगाई गई। इसे लेकर प्रशासक ने अब अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं कि जल्द से जल्द यहां फायर फाइटिंग सिस्टम लगाया जाए।
कई वर्षों से उठ रही इस मांग को लेकर हाल ही में स्थानीय निवासी अखिल ने पंजाब के राज्यपाल व चंडीगढ़ के प्रशासक गुलाबचंद कटारिया से मुलाकात की, जिसके बाद प्रशासक ने चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड को तुरंत फायर फाइटिंग सिस्टम स्थापित करने के आदेश जारी कर दिए। अखिल ने प्रशासक को बताया कि कई वर्षों से लोग डर के साए में जी रहे हैं। वहां आग लगने की घटनाएं भी होती रहती हैं इसलिए फायर फाइटिंग सिस्टम लगाना बेहद जरूरी है। रखरखाव को लेकर जो विवाद चल रहा था उस पर भी प्रशासक ने कहा है कि वहां के लोग इस फायर फाइटिंग सिस्टम का रखरखाव नहीं करेंगे क्योंकि प्रशासन के कागजों में ही उन्हें किराएदार कहा गया है, ऐसे में रखरखाव की जिम्मेदारी भी चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड की होगी। प्रशासक ने कहा कि यहां रह रहे हजारों लोगों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है।
नेशनल बिल्डिंग कोड का भी हो रहा उल्लंघन
धनास कॉलोनी शहर की सबसे बड़ी पुनर्वास कॉलोनी है, जिसमें 8,448 फ्लैट्स बनाए गए हैं। इन फ्लैट्स को 2013 में झुग्गी-झोपड़ी से पुनर्वासित परिवारों को आवंटित किया गया था लेकिन एक दशक से अधिक समय बीतने के बावजूद यहां फायर फाइटिंग सिस्टम नहीं लगाया गया। इससे हजारों लोग संभावित खतरे में हैं। स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं ने कहा कि नेशनल बिल्डिंग कोड (एनबीसी)-2016 के तहत बहुमंजिला रिहायशी परिसरों में फायर फाइटिंग उपकरण अनिवार्य हैं। आरोप यह भी है कि यूटी एस्टेट ऑफिस ने बिना सुरक्षा इंतजामों की पुष्टि किए ही फ्लैट्स को ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट जारी कर दिए जिससे प्रशासनिक जिम्मेदारी पर सवाल उठे हैं।
मलोया में लगाए सिस्टम, फिर धनास में अब तक क्यों नहीं
जानकारी के अनुसार वर्ष 2018-19 से ही फायर फाइटिंग सिस्टम लगाने को लेकर मुद्दा चल रहा है। कभी अधिकारियों ने कहा कि फायर स्टेशन बना दिया जाए। कभी दमकल की गाड़ियां खड़ी करने का प्रस्ताव बनाया गया। ऐसे कई प्रस्तावों पर काफी समय बर्बाद हुआ। 2020 में तत्कालीन चीफ फायर ऑफिसर ने भी सुपरिंटेंडेंट हाउसिंग को कॉलोनी के सभी फ्लैट्स के लिए फायर क्लीयरेंस लेने के निर्देश दिए थे और चेतावनी दी थी कि पालन न करने पर कार्रवाई होगी। इसके बावजूद ठोस कदम नहीं उठाए गए। वहीं, मलोया की इसी तरह की पुनर्वास कॉलोनी में लगभग 4,960 फ्लैट्स में पहले ही फायर फाइटिंग सिस्टम स्थापित किया जा चुका है।