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चंडीगढ़ की हेरिटेज संभालेगा प्रशासन, हर हेरिटेज फर्नीचर के डिजाइन का होगा पेटेंट

Fri, 15 Jan 2021 02:14 AM IST
पंचकुला ब्‍यूरो रिशु राज सिंह, अमर उजाला, चंडीगढ़
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हेरिटेज फर्नीचर। - फोटो : फाइल फोटो
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चंडीगढ़ यूटी प्रशासन शहर के सभी हेरिटेज फर्नीचर के डिजाइन को पेटेंट कराने की तैयारी कर रहा है। इसके लिए हेरिटेज प्रोटेक्शन सेल के चेयरमैन व प्रशासक के सलाहकार मनोज परिदा के आदेश पर प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है। साथ ही सभी हेरिटेज वस्तुओं की नंबरिंग और वीडियो रिकॉर्डिंग भी की जाएगी। इसके लिए एक कमेटी का गठन कर दिया गया है।

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प्रशासक के सलाहकार मनोज परिदा ने बताया कि पियरे जेनरे या फिर उनके परिवार को उनके द्वारा बनाई गई वस्तुओं के डिजाइन का पेटेंट कराना चाहिए था। अब प्रशासन इस पर काम कर रहा है। पेटेंट हो जाने से हेरिटेज फर्नीचर के जैसे दिखने वाले फर्नीचर कोई नहीं बना सकेगा। न ही उसकी तस्करी कर सकेगा। अगर कोई फर्नीचर बनाना चाहेगा तो उसे रॉयल्टी चुकानी होगी। इससे कुछ हद तक हेरिटेज फर्नीचर की सुरक्षा हो सकेगी। 

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हेरिटेज प्रोटेक्शन सेल के सदस्य अजय जग्गा ने बताया कि वह हेरिटेज फर्नीचर को पेटेंट कराने को लेकर प्रस्ताव तैयार कर रहे हैं। शहर का हेरिटेज फर्नीचर पिछले कई सालों से विदेशों में लाखों में नीलाम हो रहा है। यह सभी फर्नीचर चंडीगढ़ के पंजाब यूनिवर्सिटी, यूटी सचिवालय, पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट, विभिन्न स्कूल व कॉलेज का है। इनके चाहने वाले इसे मुंहमांगी कीमत पर खरीदते हैं। दाम कई गुना ज्यादा होने की वजह से इसकी तस्करी भी बढ़ गई है।

शहर की हेरिटेज वस्तुओं का रिकॉर्ड होगा डिजिटल
शहर में कितनी हेरिटेज वस्तुएं हैं, यह प्रशासन को भी नहीं पता इसलिए इनकी सुरक्षा करने से पहले, इनकी वास्तविक संख्या की जानकारी होनी जरूरी है। इसके लिए मनोज परिदा ने अधिकारियों की एक कमेटी का गठन किया है, जो शहर के सभी हेरिटेज फर्नीचरों के रिकॉर्ड को डिजिटल करने के काम में जुट गई है। 

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परिदा ने बताया कि यह कमेटी शहर के सभी हेरिटेज वस्तुओं की पहचान कर उनकी नंबरिंग करेगी और उसकी विडियो रिकॉर्डिंग भी करेगी। सभी की जानकारी डिजिटल माध्यम से सुरक्षित रखी जाएगी ताकि भविष्य में हेरिटेज फर्नीचर की तस्करी पर पूरी तरह के रोक लगाई जा सके। 

गौरतलब है कि भारतीय पेटेंट कार्यालय को पेटेंट, डिजाइन और ट्रेड मार्क्स (सीजीपीडीटीएम) के नियंत्रक जनरल के कार्यालय द्वारा प्रशासित किया जाता है। इसका मुख्यालय कोलकाता में है और यह वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के आदेशानुसार काम करता है।

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चंडीगढ़ पर तस्करों की नजर, कभी इंटरव्यू तो किसी अन्य बहाने करते हैं संपर्क

हेरिटेज फर्नीचर की कीमत लाखों-करोड़ों में होने की वजह से तस्कर चंडीगढ़ पर नजर गड़ाए रहते हैं। हेरिटेज प्रोटेक्शन सेल के सदस्य अजय जग्गा ने बताया कि एक बार कनाडा की एक कंपनी ने उनसे संपर्क किया और कहा कि वह चंडीगढ़ के हेरिटेज फर्नीचर को बचाना चाहती है। इसके लिए कंपनी हेरिटेज फर्नीचर में रिफ्ड टेक्नोलॉजी लगाना चाहती है। 

साथ ही उन्होंने बताया कि वह कला प्रेमी हैं और चंडीगढ़ की विरासत को सुरक्षित रखने में मदद करना चाहते हैं। इसको लेकर वह जग्गा से मिले भी। जग्गा ने उनसे प्रस्ताव मांगा। उन्होंने कहा कि वह देखना चाहते हैं कि फर्नीचर कहां-कहां हैं। इस पर जग्गा ने कहा कि उन्हें सरकार से इजाजत लेनी होगी। 

कंपनी ने कहा कि वह बहुत किफायती दाम पर काम करेंगे और एवज में जो फर्नीचर बचेगा, वह उन्हें चाहिए होगा। जग्गा ने कहा कि वह लकड़ी का एक टुकड़ा भी देश से बाहर नहीं ले जा सकेंगे। तीन साल बाद भी अब तक कंपनी की तरफ से कोई जवाब नहीं आया। इसी तरह, अमेरिका में एक इंटरव्यू के बहाने हेरिटेज फर्नीचर की जगह देखने के लिए भी जग्गा से संपर्क किया गया था, हालांकि उस मामले में भी जग्गा भांप गए थे और उन्हें मना कर दिया था।

विदेश तक ऐसे पहुंचता है हेरिटेज फर्नीचर
बीते नवंबर में क्राइम ब्रांच ने पंजाब यूनिवर्सिटी से हेरिटेज कुर्सियां चोरी करने वाली महिला, बढ़ई और कबाड़ी को गिरफ्तार किया था। इनके कब्जे से टीम ने करीब 35 हेरिटेज कुर्सियां बरामद की थीं। जांच में सामने आया कि बढ़ते डिमांड के आधार पर पसंदीदा हेरिटेज फर्नीचर को संस्था के अंदर चोरी किया जाता है।

इसके बाद फर्नीचर को कबाड़ियों के हाथों सस्ते दामों में बेच दिया जाता है और फिर कबाड़ी बढ़ई की मदद से इन फर्नीचर को नया रंगरूप दे देते हैं। इसके बाद दलाल कबाड़ी से संपर्क कर फर्नीचर को महंगे दामों में खरीदकर दिल्ली व मुंबई के एयरपोर्ट तक पहुंचाकर विदेश भिजवा देते हैं, जहां नीलामी में फर्नीचर को बेचा जाता है।
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