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प्रशासन ने सभी मिनी कोविड केयर सेंटर के संचालकों के सामने रखे 'दो विकल्प'

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चंडीगढ़। शहर में अब कोरोना के मामले कम हो गए हैं। कोरोना मरीजों को रखने के लिए बनाए गए मिनी कोविड केयर सेंटर अब खाली पड़े हैं। मिनी कोविड केयर सेंटर के प्रभारी यशपाल गर्ग ने सभी संचालकों को पत्र लिखा है और इन सेंटरों के भविष्य को लेकर उनके सामने दो विकल्प रखे हैं।
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यशपाल गर्ग ने श्री गुरु ग्रंथ साहिब सेवा सोसाइटी, कोंपिटेंट फाउंडेशन व भारत विकास परिषद, कंधारी बेवरेजेस प्राइवेट लिमिटेड, बी श्योर बड्डी प्राइवेट लिमिटेड, श्री सत्य साईं ग्रामीण जागृति और यूनाइटेड सिख को पत्र लिखा है। इसमें उन्होंने कहा है कि कोरोना की दूसरी लहर में इन संस्थाओं की तरफ से जो योगदान दिया गया, वह बेहद सराहनीय है। अब तक बेहद प्रोफेशनल तरीके से व क्वालिफाइड डॉक्टरों और नर्सों की मदद से इन सेंटरों में मरीजों की सेवा की गई है। उन्हें काफी अच्छा भोजन व अन्य सुविधाएं भी प्रदान की गई। अब कोरोना के मामलों में तेजी से गिरावट आई है। ऐसे में इन सेंटरों के भविष्य को लेकर फैसला करना है। पत्र में कहा गया है कि कोरोना की तीसरी लहर की आशंका जताई गई है। ऐसे में प्रशासन की तरफ से संस्थाओं को दो विकल्प दिए जा रहे हैं। पहले विकल्प में कहा गया है कि सभी मरीजों को घर भेजने के बाद संस्था मिनी कोविड केयर सेंटर को पूरी तरीके से बंद कर दे और जगह को खाली कर दिया जाए। दूसरा विकल्प, जब तक मरीज नहीं है तब तक सेंटर को अस्थाई तौर पर बंद कर दिया जाए और 30 सितंबर तक वहां पर जो चीजें लगाई गई हैं, उसे वैसे ही रखा जाए। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि दूसरा विकल्प चुनने पर संस्था को अपने खर्चे पर सिक्योरिटी का इंतजाम करना होगा। अगले तीन दिन के अंदर संस्थाओं से उनके विचार मांगे गए हैं, ताकि इस पर आगे फैसला लिया जा सके।
पांच सेंटर में अब सिर्फ सात मरीज ही भर्ती
दूसरी लहर में मरीजों के बढ़ने के बाद शुरू किए गए कुछ मिनी कोविड केयर सेंटर बंद हो गए हैं, जबकि कुछ खाली पड़े हैं। कुल पांच सेंटरों को मिलाकर सिर्फ सात मरीज ही भर्ती हैं। प्रशासन के अधिकारियों का मानना है कि शहर में कोरोना की चपेट में आए लोगों को बचाने में मिनी कोविड केयर सेंटर का अहम योगदान रहा है। शहर में अचानक बढ़े कोरोना के मरीज, ऑक्सीजन की भारी कमी और बेड की उपलब्धता नहीं होने के बाद प्रशासन ने शहरवासियों ने आग्रह किया था कि वह आगे आएं और उनकी मदद करें। प्रशासन के आग्रह पर शहर की कई संस्थाएं, उद्योगपति व अन्य लोग सामने आए और उन्होंने अपने स्तर पर अस्थायी अस्पताल बनाने की बात कही। प्रशासन ने सभी को जगह मुहैया कराई। इसके बाद इन सभी संस्थाओं व उद्योगपतियों ने बेड, ऑक्सीजन, स्वास्थ्यकर्मी, खाने-पीने आदि की व्यवस्था खुद की। शुरू में कुल सात सेंटर खुले, लेकिन मरीजों के नहीं होने पर दो सेंटर बंद कर दिए गए, जिसके बाद अभी भी पांच सेंटर चल रहे हैं। हालांकि, इसमें से भी तीन में एक भी मरीज नहीं है। बाकी दो में कुल सात मरीज भर्ती हैं।
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