चंडीगढ़ में आईटी कंपनियों में काम कर रहे हजारों लोगों की नौकरियां छूटने की कगार पर आ गई है। दरअसल, चंडीगढ़ के आईटी पार्क में स्थित डीएलएफ कैंपस में चल रही 9 नॉन आईटी कंपनियां बंद होने जा रही हैं। प्रशासन ने इन कंपनियों को नोटिस जारी कर दिया है।
प्रशासन इस मामले में अब किसी भी तरह की ढील बरतने के मूड में नहीं है। बिल्डिंग में मिसयूज और वायलेशन की शिकायत पर की गई रेड में ढेरों खामियां सामने आई हैं।
सबसे बड़ा मामला बिल्डिंग के मिसयूज का सामने आ रहा है। बिल्डिंग में 9 नॉन आईटी कंपनियां चल रही हैं। जबकि आईटी कंपनियों के लिए प्रशासन ने जमीन सस्ते दामों पर अलाट की हुई है।
एस्टेट ऑफिस की रिपोर्ट को देखते हुए ही सोमवार को सेक्रेटरी एस्टेट कम फाइनेंस सर्वजीत सिंह ने बिल्डिंग को दो महीने में खाली कराने के आदेश जारी किए थे। साथ ही अभी तक नॉन आईटी कंपनियों से वसूला गया किराया भी जमा करवाने के आदेश जारी किए थे।
इससे पहले एस्टेट ऑफिस ने 23 और 24 सितंबर को दो टीमें बनाकर असिस्टेंट एस्टेट ऑफिसर प्रिंस धवन की अगुवाई में डीएलएफ बिल्डिंग में रेड की थी। जिसमें बिल्डिंग पार्टिशियन सेंक्शन नहीं होने से लेकर कई खामियां मिलीं। साथ ही नॉन आईटी कंपनियां भी चलती मिलीं।
सैकड़ों की नौकरी पर लटकी तलवार
आईटी पार्क में इन्फोसिस के बाद डीएलएफ का कैंपस सबसे बड़ा है। डीएलएफ कैंपस साढ़े 12 एकड़ में फैला है। इसमें करीब 15 कंपनियां चल रही हैं। इन कंपनियों में सैकड़ों लोग नौकरी कर रहे हैं।
इनमें सबसे ज्यादा संख्या युवाओं की है। यदि इतनी कंपनियां एक साथ बंद होती हैं तो सैकड़ों लोगों की नौकरी चली जाएगी। नौकरी पर तलवार लटकी देख पूरे कैंपस में चिंता का माहौल बना है।