यूटी प्रशासन एडीसी तन्वी गर्ग पर इस कदर मेहरबान है कि उनका ट्रांसफर रोकने के लिए शहर में एडिशनल डिप्टी कमिश्नर (एडीसी) और एडिशनल डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट (एडीएम) को अलग-अलग कर दिया है। अभी तक एडीसी के पास ही एडीएम का अधिकार होता है। जैसे डीसी को डीएम का अधिकार होता है।
लेकिन, अब उम्मीद है कि सोमवार से एडीसी तो तन्वी गर्ग ही होंगी, लेकिन एडीएम का चार्ज एसडीएम (साउथ) कशिश मित्तल को मिलेगा। ऐसा सिर्फ इसलिए होगा, क्योंकि यूटी प्रशासन चंडीगढ़ की मौजूदा एडीसी तन्वी गर्ग पर मेहरबान है और चुनाव से पहले प्रशासन उनका तबादला नहीं करना चाहता है।
साथ ही यह भी पहली बार होगा, जब एडीसी के पास एसडीएम (सेंट्रल) का चार्ज भी नहीं होगा। प्रशासन अब तन्वी गर्ग से एसडीएम (सेंट्रल) का चार्ज लेकर उसे एसडीएम (ईस्ट) दानिश अशरफ को देने की तैयारी कर रहा है।
चुनाव आयोग के निर्देश के मुताबिक, ऐसे किसी अधिकारी की चुनाव में ड्यूटी नहीं लगाई जा सकती है या उसे एडीएम, एसडीएम, तहसीलदार जैसे पदों पर नहीं नियुक्त रहने दिया जा सकता है जो अपने होम टाउन में पोस्टेड हैं। चंडीगढ़ के सेक्टर-44 निवासी तन्वी गर्ग लगभग ढाई साल से चंडीगढ़ में पोस्टेड हैं।
अब जब प्रशासक के चुनाव आयोग का यह पत्र मिला तो प्रशासन ने तन्वी गर्ग का तबादला करने से पहले उन्हें चंडीगढ़ में ही रोकने के प्रयास शुरू कर दिए।
यूटी के कार्मिक विभाग ने प्रशासन के गृह सचिव और चीफ इलेक्टोरल अफसर को भेजे पत्र में स्पष्ट किया कि तन्वी गर्ग से एडीएम और एसडीएम का चार्ज चुनाव तक लेकर दूसरे अधिकारियों को दे दिया जाएगा।
लेकिन, उन्हें पर्यटन निदेशक, सिटको के एमडी, एडिशनल लेबर कमिश्नर, खाद्य एवं आपूर्ति की अतिरिक्त निदेशक और एक्साइज एंड टैक्सेशन की अतिरिक्त आयुक्त जैसे पदों पर रहने दिया जाए। इस पत्र में कार्मिक विभाग ने चुनाव आयोग से यह मामला उठाने की बात भी कही है।
एमएचए को पत्र लिखकर तबादला रोकने को कहा
केंद्रीय गृह मंत्रालय (एमएचए) ने सितंबर, 2013 में तन्वी गर्ग का तबादला मिजोरम कर दिया था। इसके बाद मिजोरम में विधान सभा चुनाव तक तबादला रुक गया। लेकिन, सूत्रों का कहना है कि इसी बीच गर्ग ने एमएचए को सीधा पत्र लिखकर अपने तबादले पर रोक लगाने की मांग की।
जबकि, नियमों के तहत वह सीधे पत्र एमएचए को नहीं भेज सकती हैं। तबादले पर रोक लगाने संबंधी पत्र प्रशासक के सलाहकार द्वारा भेजा जाता है। हालांकि, एक पत्र सलाहकार की तरफ से भी गया था।
दो एईआरओ भी हटेंगे
चुनाव के दौरान ऐसा कोई असिस्टेंट इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन अफसर (एईआरओ) भी नियुक्त नहीं हो सकता है, जिसका होम टाउन चंडीगढ़ है। ऐसे में अब प्रशासन दो एईआरओ को भी हटा कर उनका काम किसी और एईआरओ को देगा।
पीसीएस अधिकारी राहुल गुप्ता और एमएम सभरवाल का होम टाउन चंडीगढ़ है। ऐसे में उन्हें एईआरओ नहीं नियुक्त किया जा सकता है। उनके क्षेत्र को अब दूसरे एईआरओ देखेंगे।
पहले भी दिखाई है मेहरबानी
यह पहला मौका नहीं है जब प्रशासन ने अपने होम टाउन में पोस्टेड यूटी कैडर की किसी अधिकारी का तबादला रोकने के लिए मेहरबानी दिखाई है।
यूटी कैडर की 2006 बैच की आईएएस अधिकारी और चंडीगढ़ की मौजूदा आईटी सचिव और अतिरिक्त गृह सचिव प्रेरणा पुरी लगभग सात सालों से चंडीगढ़ में ही पोस्टेड हैं। कई बार उनका तबादला हो चुका है, लेकिन हर बार उनके तबादले को रुकवा दिया जाता है और चंडीगढ़ में उनकी पोस्टिंग को एक्सटेंड कर दिया जाता है।
अब अगले माह उनकी एक्सटेंशन खत्म हो रही है। लेकिन, आचार संहिता लगने के कारण उनका तबादला अब चुनाव के बाद ही होगा। चुनाव आयोग की ओर से भेजे गए नियमों में स्पष्ट है कि कोई भी अधिकारी तीन साल या इससे ज्यादा एक ही जगह पर पोस्टेड न हो।
विवादों से पुराना नाता
एडीसी चंडीगढ़ तन्वी गर्ग का विवादों से पुराना नाता है। सेक्टर-44 में एक ज्वेलर की कार से टक्कर होने पर कई दिनों तक विवाद चला था।
इसके बाद जुलाई में जब प्रशासन ने सिटको के एमडी डीके तिवारी को रिलीव कर गर्ग को एमडी के पद का अतिरिक्त कार्यभार दे दिया तब भी विवाद हो गया था। क्योंकि गर्ग इस पद के लिए काफी जूनियर हैं।
यह पद पंजाब के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी के लिए होता है। अब सिटको के जीएम एके मल्होत्रा के निलंबन के मामले में भी गर्ग विवादों में घिर र्गइं हैं।