चंडीगढ़। संपत्ति कर नहीं जमा कराने वालों के खिलाफ नगर निगम अब सीलिंग की कार्रवाई करने जा रहा है। दिवाली की वजह से कार्रवाई को रोक दिया गया था। नगर निगम उन संपत्तियों के खिलाफ कार्रवाई करने जा रहा है, जो कई नोटिस के बाद भी संपत्ति कर नहीं जमा करा रहे हैं। इसमें ज्यादातर व्यावसायिक संपत्तियां हैं।
नगर निगम ने संपत्ति कर न जमा कराने वाले टॉप 2000 व्यावसायिक-आवासीय संपत्तियों के मालिकों को नोटिस भेजा था और 30 अक्तूबर तक का समय दिया था लेकिन अधिकतर ने बकाया जमा नहीं कराया। कई ने निगम से सुनवाई की मांग की। उन्हें समय भी दिया गया और वर्तमान में भी रोजाना व्यक्तिगत सुनवाई चल रही है। इसके बावजूद नगर निगम ने अब तक करीब 50 करोड़ रुपये के संपत्ति कर की वसूली की है लेकिन निजी संपत्तियों का कुल करीब 146 करोड़ और सरकारी संस्थाओं का करीब 88 करोड़ रुपये बकाया है। वर्ष 2023-24 के के लिए संपत्ति कर जमा करने को 31 मई तक का समय दिया गया था। इसके बाद निगम ने सभी को नोटिस भेजना शुरू किया और उन्हें संपत्ति कर जमा कराने को कहा। निगम ने उन टॉप 2000 व्यावसायिक-आवासीय डिफॉल्टर की सूची तैयार की, जिन पर सबसे ज्यादा संपत्ति कर बकाया है। इसमें से एक हजार व्यावसायिक और एक हजार आवासीय डिफॉल्टर हैं। सबसे ज्यादा करीब 138 करोड़ व्यावसायिक डिफॉल्टर पर और आवासीय डिफॉल्टर पर आठ करोड़ बकाया है। निगम के एक अधिकारी ने बताया कि टॉप डिफॉल्टरों को संपत्ति कर जमा कराने के लिए कई बार समय और नोटिस जारी किया जा चुका है। वह जानबूझकर संपत्ति कर नहीं देना चाहते, इसलिए उनके खिलाफ कार्रवाई शुरू की जाएगी। बुधवार से उन संपत्तियों को सील करने के आदेश जारी किए जाने शुरू कर दिए जाएंगे।
कई नियमों में सुधार करेगा निगम, घोषित किए जाएंगे गुड टैक्स पेयर्स
पीयू की तरफ से मांग की गई है कि उनके हॉस्टल पर व्यावसायिक संपत्ति कर लगाया जा रहा है, जबकि आवासीय लगना चाहिए। निगम इस पर भी विचार कर रहा है। इसके अलावा सरकारी संपत्तियों के कर से जुड़े कई नियमों में भी सुधार करने जा रहा है, जिसमें भुगतान संबंधित, एरिया विवाद अन्य हैं। किसी संपत्ति को अगर गलत कैटेगरी में डाला गया होगा तो उसे भी ठीक किया जाएगा। निगम ने फैसला लिया है कि जो भी करदाता पिछले पांच साल से नियमित तौर पर संपत्ति कर जमा कराएगा, उन्हें गुड टैक्स पेयर्स घोषित किया जाएगा। उन्हें अतिरिक्त छूट समेत अन्य लाभ दिए जाएंगे। उनकी सुनवाई भी जल्द होगी। साल में एक दिन उन्हें सम्मानित भी किया जाएगा। यह प्रस्ताव नगर निगम की अगली सदन की बैठक में लाया जाएगा। मंजूरी मिलने के बाद इसे लागू कर दिया जाएगा।
संपत्ति कर चुकाने को राजी हुआ पीयू, मांगा समय
संपत्ति कर नहीं चुकाने में निजी संपत्तियों के अलावा सरकारी संस्थाएं भी काफी आगे हैं। कई सरकारी इमारतों पर करीब 88 करोड़ का संपत्ति कर बकाया है। इनमें चंडीगढ़ का रेलवे स्टेशन, होटल शिवालिक व्यू, पीजीआई, पीयू, हरियाणा और पंजाब का मिनी-सचिवालय समेत अन्य हैं। पीयू के अधिकारियों ने हाल ही में निगम के अधिकारियों के साथ बैठक की है। वो अब कर चुकाने को राजी हो गए हैं। पीयू पर करीब 25 करोड़ बकाया है। उन्होंने कर चुकाने के लिए समय मांगा है।