फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

आपको रूला देगी एसिड अटैक पीड़ितों की दास्तां

Thu, 04 Sep 2014 05:33 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
विज्ञापन
विज्ञापन
'मुझे तो पहले तेजाब का मतलब भी नहीं पता था। जब मुझ पर तेजाब फेंका गया तो पहले लगा कि कुछ दिनों या महीनों मे सब ठीक हो जाएगा। इस खौफनाक दर्द का मुझे बाद में एहसास हुआ।
विज्ञापन


एसिड अटैक के तीन साल तक तो मैंने शीशा भी नहीं देखा था। बच्चे मुझसे डरते थे। मैं खुद अपने आप को देखकर डर जाती थी।' तेजाब पीड़ित रूपा ने कुछ इस तरह अपने साथ हुई घटना के बारे में बताया।

बुधवार को प्रेस क्लब में ग्रीफ सपोर्ट हेल्प लाइन की घोषणा के मौके पर रूपा दो अन्य एसिड अटैक सरवाइवर लक्ष्मी और रितू के साथ पहुंची थीं। रूपा ने बताया कि अगस्त, 2008 में उन पर एसिड अटैक हुआ। तब वे सो रही थीं।
विज्ञापन

Trending Videos

'हादसे के बाद छोड़ दिया था लाल रंग पहनना'

रूपा ने बताया कि पहले ऐसा लगा कि बारिश हो रही है। उठी तो आंखों के सामने अंधेरा छा गया। चेहरा भारी हो चुका था। असहनीय दर्द हो रहा था। अस्पताल में जाकर पता चला कि अब इस दर्द के साथ जिंदगी काटनी पड़ेगी।

रूपा पर तेजाब उनकी सौतेली मां ने ही फेंकवाया था। अब रूपा दिल्ली की स्टॉप एसिड अटैक्स एनजीओ से जुड़ी हैं। इस एनजीओ में करीब 300 तेजाब पीड़ितों को जीने की राह दिखाई जा रही है।

रितू पर मई, 2012 को उनके बुआ के बेटे ने प्रॉपर्टी विवाद के चलते तेजाब फेंका दिया था। रितू ने बताया कि जिस दिन ये हादसा हुआ उस दिन उन्होंने लाल रंग के कपड़े पहने थे। घटना के बाद उन्होंने लाल रंग पहनना ही छोड़ दिया। रितू ने बताया कि घटना के बाद उनके दोस्तों साथ छोड़ दिया, सिर्फ परिवार ने साथ दिया।
विज्ञापन

शादी से मना किया तो तेजाब फेंक दिया: लक्ष्मी

एसिड अटैक सरवाइवर लक्ष्मी ने बताया कि उनसे 17 साल बड़े व्यक्ति ने उन पर तेजाब फेंक दिया था। वह उससे शादी करना चाहता था। मना करने पर उसने तेजाब फेंक दिया। लक्ष्मी ने बताया कि हादसे के बाद वे पूरी तरह टूट गई थीं।

शीशा देखती थीं तो मरने का दिल करता था। लोग मुझसे बात भी नहीं करते थे। लोग हादसे के लिए मेरा ही कसूर निकालते थे। अब लोगों का नजरिया बदल गया है। बुधवार को टैरो रीडर और लाइफ कोच रेनू माथुर ने ग्रीफ सपोर्ट हेल्प लाइन 0172-5048788 शुरू की।

रेनू ने कहा कि जिनके साथ ऐसे हादसे होते हैं, उनको लंबे समय के लिए काउंसिलिंग की जरूरत होती है। ऐसे लोग फोनकर काउंसिलिंग ले सकते हैं।

उन्होंने कहा कि ऐसे हादसों के कुछ समय बाद सब लोग भूल जाते हैं। हेल्प लाइन के जरिए ऐसे लोग अपना दुख साझा कर सकेंगे। इस हेल्प लाइन से क्रिकेटर मनन वोहरा भी जुड़े हैं।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें