तरनतारन में पांच दिन पहले अवैध शराब पीने से हुई तीन मौतों पर यदि प्रशासन चेत जाता तो शायद जिले में 30 मौतों को रोका जा सकता था। इस काले धंधे में शामिल लोगों के हौसले इतने बुलंद हैं कि गांव रटौल में एक बड़े पेड़ के नीचे लगने वाली चौपाल के नीचे मटका लगाकर अवैध शराब बेची गई। इस तरह खुलेआम शराब बेचने वालों के विरुद्ध न तो ग्राम पंचायत ने शिकायत दी और न ही सरपंच ने। मरने वालों में कई ऐसे थे जिनके परिवार में अब कमाने वाला कोई नहीं बचा।
मौतों पर राजनीति शुरू
जहरीली शराब पीने से हुई मौतों के बाद राजनीतिक पार्टियों ने अपना वोट बैंक तलाशना शुरू कर दिया है। आम आदमी पार्टी के नेता हरपाल चीमा ने प्रभावित परिवारों के साथ मुलाकात की। गांव वासियों ने उन्हें अवैध ढंग से बेची जा रही शराब के बारे में विस्तृत जानकारी दी। चीमा ने कहा कि नशे को जड़ से खत्म करने के दावे के साथ सरकार बनाने वाले कैप्टन अमरिंदर सिंह की सरकार हर फ्रंट में फेल हो चुकी है। उन्होंने सरकार से मांग की कि वह मारे गए लोगों के परिजनों को 20 -20 लाख रुपये दे। शिअद (बादल) के नेता विरसा सिंह वल्टोहा ने भी इस मामले पर सरकार को कटघरे में खड़ा किया।