दस्तावेज मांगने की अर्जी खारिज, सीबीआई पर सभी रिकॉर्ड देने की बाध्यता नहीं
संवाद न्यूज एजेंसी
चंडीगढ़। आठ वर्ष पुराने 10 लाख रुपये के रिश्वत प्रकरण में आरोपी आयुष भल्ला को विशेष सीबीआई अदालत से बड़ा झटका लगा है। अदालत ने मामले से जुड़े सभी दस्तावेज उपलब्ध कराने की मांग को लेकर दायर उसकी अर्जी को खारिज कर दिया। अदालत ने साफ किया कि जांच एजेंसी पर कानूनन केवल उन्हीं दस्तावेजों की प्रतियां देने की बाध्यता है जिनके आधार पर अभियोजन पक्ष आरोप साबित करने जा रहा है।
विशेष सीबीआई अदालत की जज भावना जैन ने आदेश में कहा कि जिन दस्तावेजों पर सीबीआई भरोसा नहीं कर रही है, उनकी प्रतियां देना अनिवार्य नहीं है। हालांकि आरोपी को यह अधिकार है कि वह नियमों के तहत सीबीआई के मालखाने में रखे रिकॉर्ड का स्वयं या अपने अधिवक्ता के माध्यम से निरीक्षण कर सकता है।
अदालत ने स्पष्ट किया कि सरकारी वकील को केवल उन्हीं दस्तावेजों की आपूर्ति करनी होती है, जिन पर अभियोजन अपना मामला आधारित करता है। जिन रिकॉर्ड पर भरोसा नहीं किया जा रहा, उनकी सूची देना ही पर्याप्त माना जाएगा। जो रिकॉर्ड अस्तित्व में नहीं है या जांच के दौरान रिकवर नहीं हो सका, उसे उपलब्ध कराने का आदेश नहीं दिया जा सकता। साथ ही अदालत ने कहा कि आरोप तय होने के चरण में आरोपी अपने बचाव के लिए अतिरिक्त दस्तावेजों की मांग नहीं कर सकता।
अर्जी में आयुष भल्ला की ओर से दावा किया गया था कि शिकायतकर्ता शिव कुमार शर्मा के मोबाइल फोन से निकाले गए पूरे डेटा की कॉपी, 1 अगस्त 2018 की कथित रिकॉर्डिंग, लुधियाना स्थित पेंट हाउस रेस्टोरेंट की डीवीआर फुटेज, 2 अगस्त को आईजीपी कार्यालय की वाई-फाई कैमरा रिकॉर्डिंग और 7 अगस्त की विजिट से जुड़े ऑडियो-वीडियो रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं कराए गए हैं।
वहीं सीबीआई ने अदालत को बताया कि मोबाइल फोन से प्राप्त सभी प्रासंगिक डेटा आरोपियों को दिया जा चुका है। पेंट हाउस रेस्टोरेंट और होटल पार्क इन की डीवीआर से कोई उपयोगी रिकॉर्ड नहीं मिला, जबकि आईजीपी कार्यालय से जो रिकॉर्ड प्राप्त हुआ था, वह पहले ही उपलब्ध कराया जा चुका है। 7 अगस्त की विजिट से संबंधित किसी भी प्रकार का रिकॉर्ड अस्तित्व में नहीं है।
10 लाख रुपये की रिश्वत लेते पकड़ा था
सीबीआई ने 14 अगस्त 2018 को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7-ए के तहत केस दर्ज किया था। शिकायत के अनुसार लुधियाना में अशोक गोयल को 10 लाख रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़ा गया था। आरोप था कि यह रकम तत्कालीन आईजीपी फिरोजपुर रेंज गुरिंदर सिंह ढिल्लों की ओर से मांगी गई थी। जांच पूरी होने के बाद 20 अप्रैल 2022 को अशोक गोयल, आयुष भल्ला और सतदेव जिंदल के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई, जबकि सप्लीमेंट्री रिपोर्ट में ढिल्लों के खिलाफ अभियोजन योग्य साक्ष्य नहीं मिलने की बात कही गई।