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ऐ भाई जरा देखकर चलो: चंडीगढ़ में हादसों में 33 फीसदी पैदल चलने वालों की माैत, ये हैं बड़े कारण

Mon, 03 Feb 2025 08:56 AM IST
निवेदिता वर्मा संदीप खत्री, संवाद, चंडीगढ़

सार

इस साल जनवरी माह में 10 लोगों की सड़क हादसों में मौत हो चुकी है। इनमें सात दो पहिया वाहन चालक, एक साइकिल सवार, एक पैदल चलने वाला और एक कार सवार शामिल है। इन हादसों में तीन डिलीवरी बॉय अपनी जान गंवा चुके हैं।
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Accident demo - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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चंडीगढ़ की सड़कों पर होने वाले हादसों में पैदल चलने वाले 33 प्रतिशत लोग अपनी जान गंवा दे रहे हैं। साल 2024 में 78 सड़क हादसों में 81 लोगों की जान गई।
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जान गंवाने वालों में 27 लोग पैदल चलने वाले थे, जबकि 8 साइकिल सवार थे। साल 2023 में 64 हादसों में 67 मौतें हुई थी, जिसमें 28 पैदल चलने वाले लोग शामिल हैं। ऐसे में बीते वर्ष इनका प्रतिशत 41 से अधिक था। वहीं, 12 सालकिल सवार भी अपनी जान गंवा चुके हैं। ट्रैफिक पुलिस के अनुसार जेब्रा क्रॉसिंग करते समय सबसे अधिक हादसे हुए, जिसमें राहगीरों की मौत हुई। इसके पीछे सबसे बड़ा कारण वाहनों की तेज रफ्तार रही। वर्ष 2024 में सबसे अधिक सेक्टर-11 थाने के अंतर्गत 11 मौतें हुईं, जबकि सेक्टर-3 थाने और सेक्टर-26 थाने के अंतर्गत 8-8 लोगों ने अपनी जान गंवाई।
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एक महीने में 10 लोगों की मौत

इस साल जनवरी माह में 10 लोगों की सड़क हादसों में मौत हो चुकी है। इनमें सात दो पहिया वाहन चालक, एक साइकिल सवार, एक पैदल चलने वाला और एक कार सवार शामिल है। इन हादसों में तीन डिलीवरी बॉय अपनी जान गंवा चुके हैं। ओवर स्पीड का एक हादसा ऐसा रहा, जिसमें बीएमडब्ल्यू कार सवार 10 साल के बच्चे की भी मौत हो गई थी।

ईस्ट डिवीजन में हुईं सबसे अधिक मौतें

साल 2024 में कुल 81 मौतें हुईं। सबसे ज्यादा ईस्ट डिवीजन में हुईं, जिनमें सेक्टर-19 थाना, इंडस्टि्रयल एरिया थाना, मनीमाजरा, मौलीजागरां और आईटी पार्क थाना शामिल है, जहां 33 मौतें हुईं। इसके बाद सेंट्रल डिवीजन का नंबर आता है, जिसमें सेक्टर-3, 11, 17 और सारंगपुर के पुलिस स्टेशन शामिल हैं। यहां 25 मौतें हुईं। सेक्टर-36, 39, मलोया को कवर करने वाले दक्षिण-पश्चिम डिवीजन में 13 मौतें हुई, जबकि दक्षिण-पूर्व डिवीजन में 10 लोगों की जान गई।

स्कूल के पास 25 की तय है रफ्तार

ट्रैफिक पुलिस ने चौराहों के पास साइन बोर्ड लगा रखे हैं। इन पर 30 की रफ्तार तय की गई है। यानि किसी भी सड़क पर चौक के नजदीक जाते ही रफ्तार 30 की होनी चाहिए, लेकिन वाहन चालकों की रफ्तार कम नहीं हो रही। इस कारण से सड़क पार करने वाले राहगीर सड़क हादसों का शिकार हो रहे हैं। जबकि पहला अधिकार पैदल चलने वाले का सड़क पर है। जेब्रा क्रॉसिंग पर लोगों को दौड़कर सड़क पार करनी पड़ती है। चौराहे और लाइट पॉइंट पर वाहन चालक रफ्तार कम नहीं करते, जिस कारण से पैदल चलने वालों की मौत हो रही है।

ट्रैफिक पुलिस ने शहर के हाईवे, जैसे दक्षिण मार्ग और विकास मार्ग हैं, यहां कार की रफ्तार 60 किलोमीटर प्रतिघंट तय की हुई है। दो पहिया वाहन की 45, बस और ट्रक की 50 की रफ्तार तय की गई है। हैरानी इस बात की है कि इस मार्ग पर डेढ़ सौ से अधिक रफ्तार पर वाहन दौड़ रहे हैं, जिसका ट्रैफिक पुलिस ने चालान भी किया है।

साल                      2022       2023            
फैटल हादसे               79          64
हादसे में मारे गए          83          67
नॉन फैटल हादसे         158        118
घायल                     203        171

सड़क में जान गंवाने वाले
साल            पैदल      साइकिल सवार     दो पहिया     ऑटो रिक्शा    कार     कुल

2022-23      12             40               02              05         01      83
2023-23      12             21               02              01          03     67

साल               रफ्तार
2022            1,89,688
2023            2,07,953
2024            1,47,609

ऊंची ग्रिल हादसों का ग्राफ लाएगी नीचे 

अमर उजाला ने शहर में दौरा किया तो देखा गया कि कई जगहों पर दो से ढाई फिट की ग्रिल लगी है। जहां से लोग सड़क पार करते हैं। ऐसे में सड़क हादसे होने के चांस बढ़ते हैं। सेक्टर 22/35 की डिवइडिंग रोड पर दो फिट की ग्रिल लगी है। कई जगहों पर डिवाइडिंग रोड पर काफी लंबी ग्रिल लगी है, जिससे लोग सड़क पार नहीं कर पाते और सड़क हादसे भी नहीं होते। ऐसे में ट्रैफिक पुलिस कोशिश कर अगर शहर में लगी इन ग्रिल को लंबी करवा दें तो लोग जेब्रा क्रॉसिंग से ही सड़क पार कर सकेंगे।

सड़क हादसे रोकने के लिए स्पीड रडार से वाहन चालको के चालान किए जा रहे हैं। रात के समय ड्रंकन ड्राइविंग नाके लगाए जा रहे हैं। ट्रैफिक पुलिसकर्मियों की अलग अलग टीमों को रात को भी शहर में तैनात किया गया है, ताकि सड़क हादसे न हो सकें। -श्री प्रकाश, डीएसपी ट्रैफिक
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