दो साल पहले उमर खालिद को अपना बेटा बताकर विवादों में आए दिल्ली यूनिवर्सिटी के प्रो. अपूर्वानंद वीरवार को जब पीयू आए तो एबीवीपी कार्यकर्ताओं ने विरोध किया। प्रो. अपूर्वानंद को क्रिटिक क्लब ने फिलॉसफी विभाग में एक स्पेशल लेक्चर के लिए बुलाया था।
जब वे पीयू आए तो एबीवीपी के कार्यकर्ता उनका विरोध करने आए और साथ में प्रो. की ओर से दिए गए विवादित बयान के पेपर भी लाए। एबीवीपी ने कहा कि विवादित बयान देने वाले पीयू में नहीं आने चाहिएं। वहीं, एसएफएस और आइसा सहित छात्रों के कुछ लेफ्ट संघ प्रो. अपूर्वानंद के हक में थे और उनका लेक्चर सुनना चाहते थे। खैर लेक्चर शुरू हुआ तो इस दौरान मंच से प्रोफेसर ने कहा कि महात्मा गांधी को मारने की साजिश वीर सावरकर के घर बनी थी।
वहीं, दर्शक दीर्घा में बैठे एबीवीपी कार्यकर्ताओं ने कहा कि तो फिर भगत सिंह को मारने की साजिश कहां बनी थी, यह भी बताया जाए। इस पर दोनों पक्षों में बहस हो गई और एक-दूसरे का विरोध करने लगे। हालांकि, प्रोफेसर की तरफ से बीच में यह भी कहा गया कि महात्मा गांधी ने भगत सिंह को बचाने की कोशिश की थी, लेकिन दोनों पक्षों के बीच कई मुद्दों पर सहमति नहीं बनी। हालांकि, प्रोफेसर का लेक्चर पूरा हुआ और उसमें इतिहास के कुछ पुराने किस्सों का एबीवीपी समर्थन नहीं कर रही थी।
गलत तथ्यों का किया विरोध
एबीवीपी के नेता कुशल कोंडल ने बताया कि सेमिनार में गलत तथ्य पेश किए गए, इसका विरोध किया। ऐसा नहीं है कि झगड़ा हुआ, लेकिन तर्क-वितर्क हुआ। हालांकि, प्रोफेसर आक्रोश में आ गए थे। उनसे सिर्फ इतना ही कहा था कि जो तथ्य वे बता रहे हैं, उस पर छात्र जो जवाब मांग रहे हैं, वह भी बताया जाए।
डिस्कशन को खराब करना मकसद
स्टूडेंट फॉर सोसायटी (एसएफएस) नेता हरमन के मुताबिक यह एक डिस्कशन का प्लेटफार्म है, लेकिन एबीवीपी हमेशा की तरह अपनी विरोधी नीतियों के चलते इस लेक्चर को खराब करने आई थी। एबीवीपी कार्यकर्ताओं ने माइक भी बंद कराने की कोशिश की।