चंडीगढ़। जिस महीना में सूर्य की संक्रांति न हो उस महीना को अधिक मास कहा जाता है। 16 सितंबर को शाम सात बजकर सात मिनट पर सूर्य कन्या राशि में प्रवेश कर गया। अब 17 अक्तूबर को सुबह सात बजकर पांच मिनट पर सूर्य कन्या राशि से बाहर आएगा। आश्विन शुक्ल पक्ष से आश्विन कृष्ण पक्ष तक पूरे एक महीना सूर्य कन्या राशि में रहेगा। यह कहना है सेक्टर 30 के श्री महाकाली मंदिर स्थित भृगु ज्योतिष केंद्र के प्रमुख बीरेंद्र नारायण मिश्र का।
उन्होंने कहा कि पितृपक्ष के अमावस्या के बाद प्रतिपदा से शारदीय नवरात्र का शुभारंभ हो जाता है। हालांकि इस बार अधिक मास होने के कारण शारदीय नवरात्र 17 अक्तूबर से शुरू होगा। ऐसा संयोग 19 सालों के बाद आया है। वहीं शुक्रवार से अधिक मास शुरू हो गया है। इस दौरान कोई बड़ा त्योहार भी नहीं मनाया जाएगा। वहीं 17 अक्तूबर को कलश स्थापना के साथ शारदीय नवरात्र का शुभारंभ किया जाएगा।
17 से 25 अक्तूबर तक रहेगा नवरात्र
श्री देवालय पूजक परिषद के कोषाध्यक्ष और सेक्टर 18 के श्री राधा कृष्ण मंदिर के पुजारी डॉ. लाल बहादुर दुबे ने बताया कि 17 से 25 अक्तूबर तक नवरात्र होगा। 26 अक्तूबर को दशहरा और 14 नवंबर को दीपावली मनाई जाएगी।
क्या है अधिक मास
डॉ. लाल बहादुर दुबे ने बताया कि सूर्य वर्ष 365 दिन और छह घंटे का होता है। जबकि चंद्र वर्ष 354 दिनों का होता है। दोनों के बीच करीब 11 दिनों का अंतर होता है। यह अंतर तीन वर्षों में करीब एक महीना का हो जाता है। इसी अंतर को दूर करने के लिए प्रत्येक तीन वर्ष में एक बार अतिरिक्त चंद्र मास आता है। इसी को अधिक मास कहा जाता है। अधिक मास को पुरुषोत्तम मास भी कहते है, इस मास के कारण ही त्योहारों की व्यवस्था सही बनी रहती है।