बेअसर रही सहानुभूति वोट हासिल करने की योजना
लगातार पांच जीत के बाद कांग्रेस के हाथ से छिटकी जालंधर सीट
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। आम आदमी पार्टी (आप) ने जालंधर संसदीय उपचुनाव जीतकर लोकसभा में वापसी कर ली है। पार्टी के लिए यह जीत कई अन्य मामलों में भी महत्वपूर्ण साबित हुई, लेकिन इस चुनाव में हारी भाजपा, शिअद-बसपा गठबंधन और कांग्रेस में से अगर किसी को सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है तो वह कांग्रेस है। लगातार 24 साल से जालंधर संसदीय सीट पर काबिज रही कांग्रेस को इस बार जीत के लिए जनता से सहानुभूति वोट भी नहीं मिल सके।
हालांकि जालंधर उपचुनाव के परिणाम आने के बाद किसी भी दल ने अपनी हार के कारणों को लेकर कोई टिप्पणी नहीं की है, लेकिन माना जा रहा है कि करीब 35 दिन पहले कांग्रेस छोड़ आप के प्रत्याशी बने सुशील कुमार रिंकू ने उन दलित वोटों में जबरदस्त सेंध लगाई, जिन्हें कांग्रेस अब तक अपना वोट बैंक मानती रही है। इस बार इन्हीं वोटों का फायदा शिअद-बसपा भी उठाना चाह रही थी, लेकिन यह प्लान फेल हो गया। शिअद को सिख वोटरों ने भी नकार दिया। उधर, भाजपा के हाथ गैर-सिख और हिंदू वोट तो आए, लेकिन यह जीत के लिए नाकाफी रहे। इस परिणाम और प्रत्याशी को मिले वोटों की संख्या ने भाजपा को समझा दिया है कि उसकी सफलता शिअद के साथ गठबंधन में ही निहित है। अपने दम पर पंजाब में एकछत्र जीत दर्ज कर पाना भाजपा के लिए कठिन रहेगा।
15 बार मतदाताओं ने कांग्रेस के प्रत्याशी को चुना, 24 साल का रिकार्ड टूटा
जालंधर सीट पर आप प्रत्याशी की जीत ने नया इतिहास भी रच दिया है। आजादी के बाद, जालंधर से लोकसभा सांसद चुनने के लिए कुल 19 चुनाव हुए और इनमें 15 बार मतदाताओं ने कांग्रेस के प्रत्याशी को चुनकर लोकसभा भेजा। लेकिन इस बार कांग्रेस की जीत का 24 साल का रिकार्ड टूट गया। 24 साल पहले 1998 में जनता दल के प्रत्याशी इंद्र कुमार गुजराल ने शिअद के सहयोग से इस सीट पर 1.31 लाख वोटों से जीत हासिल की थी। उसके बाद कांग्रेस ने जालंधर में लगातार 5 लोकसभा चुनाव जीते। 1999 में कांग्रेस के बलबीर सिंह, 2004 में कांग्रेस के राणा गुरजीत सिंह, 2009 में कांग्रेस के मोहिंदर सिंह केपी, 2014 व 2019 में कांग्रेस के संतोख सिंह चौधरी ने इस सीट पर जीत दर्ज की थी। 2014 में संतोख चौधरी करीब 71 हजार वोटों से जीते थे, वहीं 2019 में उनकी जीत का अंतर केवल 19 हजार वोट रहा था। इस साल जनवरी में संतोख चौधरी के निधन से खाली हुई सीट पर कांग्रेस ने उनके ही परिवार को तरजीह दी और संतोख चौधरी की पत्नी करमजीत कौर को टिकट दिया। कांग्रेस को उम्मीद थी कि करमजीत कौर को कांग्रेस के पक्के वोटों के साथ-साथ सहानुभूति वोट भी मिलेंगे, जो पार्टी को इस सीट पर फिर से जीत दिलाएंगे। लेकिन आप ने कांग्रेस के सारे समीकरणों पर पानी फेर दिया।