आम आदमी पार्टी को एहसास है कि दो साल पहले वॉलंटियर्स के दम पर 92 सीटें जीतकर पंजाब की सत्ता पर कब्जा किया था, उसी ताकत के दम पर लोकसभा की जंग फतह की जा सकती है। पार्टी को वालंटियर्स की ताकत की याद आ गई है। पार्टी नेतृत्व वालंटियरों को साधने में लग गया है।
2022 के विधानसभा चुनाव में 92 सीट जीत कर सत्ता में आई आम आदमी पार्टी के लिए लोकसभा चुनाव किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं है। मुख्यमंत्री भगवंत मान अपने अंदाज से मतदाताओं को प्रभावित कर रहे हैं और पंजाब में आप की एकमात्र उम्मीद भगवंत मान ही हैं, लेकिन वॉलंटियर्स की आप के दिग्गज नेताओं से दूरी व नाराजगी का असर पहली बार देखने को मिल सकता है।
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सत्ता में आने के बाद दिग्गज नेताओं की ओर से वॉलंटियर्स को सियासी भाव नहीं देने की कीमत पार्टी को लोकसभा चुनाव में चुकानी पड़ सकती है। वॉलंटियर्स के स्थान पर चहेतों को तरजीह देने से नाराजगी पनप रही है। इसका एहसास होते ही आम आदमी पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के अलावा तमाम दिग्गज नेताओं को अब अपने वॉलंटियर्स की याद आने लगी है।
आम आदमी पार्टी को एहसास है कि दो साल पहले वॉलंटियर्स के दम पर 92 सीटें जीतकर पंजाब की सत्ता पर कब्जा किया था, उसी ताकत के दम पर लोकसभा की जंग फतह की जा सकती है। पार्टी को वालंटियर्स की ताकत की याद आ गई है। पार्टी नेतृत्व वालंटियरों को साधने में लग गया है। मुख्यमंत्री बनने के बाद भगवंत मान ने विधायकों और मंत्रियों की तरह वॉलंटियर्स मिलनी की थी। 6 अप्रैल को मोगा व जालंधर में मिलनी हो चुकी है, लेकिन जमीनी स्तर पर वॉलंटियर्स की नाराजगी फिलहाल शत प्रतिशत दूर नहीं हो सकी है। नाराज वॉलंटियर्स दबी जुबान में तर्क दे रहे हैं कि सत्ता में आने के बाद वफादार वॉलंटियर्स को नजरअंदाज करना कतई उचित नहीं है।
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मालवा में आप की पकड़ मजबूत
दूसरी तरफ विपक्षी दलों के नेताओं ने नाराज वॉलंटियर्स पर डोरे डालने शुरू कर दिए हैं। मालवा क्षेत्र के कई विधानसभा क्षेत्रों में ऐसे हालात बने हुए हैं। बता दें कि मालवा में आम आदमी पार्टी की पकड़ सबसे मजबूत मानी जाती है। मुख्यमंत्री भगवंत मान, मालवा के संगरूर से हैं और मालवा में उनकी तूती बोलती रही है। सियासत पर नजर रखने वालों की मानें तो आम आदमी पार्टी को पहली बार इस स्थिति का सामना करना पड़ सकता है, जबकि अन्य सियासी दल तो पहले से ऐसे हालात का सामना करते आ रहे हैं।
नाराजगी का असर सोशल मीडिया पर
आप के वॉलंटियर्स की नाराजगी का असर, पार्टी के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर भी पड़ रहा है। पार्टी की पोस्ट का दायरा पहले से सीमित हुआ है और पार्टी के विरोध में सोशल मीडिया पर आने वाली पोस्ट का जवाब देने वालों की संख्या कम हुई है। पार्टी फिर से वॉलंटियर्स को वापस लाने का महत्व भली भांति समझती है।