आम आदमी पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व ने अपने इतिहास के मुताबिक एक बार फिर साफ कर दिया है कि वह किसी भी हालत में दबाव की राजनीति के आगे नहीं झुकेगा। नेता प्रतिपक्ष पद पर हरपाल चीमा को नियुक्त करने का फैसला वापस लेने से साफ इंकार कर दिया। पूर्व नेता प्रतिपक्ष सुखपाल खैरा गुट की पंजाब प्रभारी मनीष सिसोदिया के साथ हुई बैठक में बात नहीं सुनी गई। दोनों ही पक्ष अपने स्टैंड पर कायम हैं। आप नेतृत्व ने दो दिन पहले खैरा को हटा कर हरपाल चीमा को नेता प्रतिपक्ष बना दिया था।
आठ विधायकों के समर्थन से उत्साहित खैरा ने हाईकमान से फैसले पर दोबारा विचार करने की मांग की थी। साथ ही दो अगस्त को बठिंडा में वॉलंटियर्स कांफ्रेंस का एलान कर हाईकमान के खिलाफ ताल ठोंक दी थी। पार्टी के चार विधायकों मीत हेयर, कुलवंत सिंह पंडोरी, जयकिशन रोडी, मनजीत सिंह बिलासपुर ने एक दिन पहले दिल्ली पहुंचकर सुप्रीमो अरविंद केजरीवाल से विवाद सुलझाने की मांग की थी। जिसके बाद आनन-फानन में रविवार शाम छह बजे सिसोदिया के आवास पर पंजाब के विधायकों की बैठक बुलाई गई।
लेकिन उससे पहले खैरा गुट ने अपनी रणनीति तय करने को दोपहर ढाई बजे अंबाला में मीटिंग रख ली। ये लोग रात नौ बजे के बाद सिसोदिया के घर पहुंचे। वहां, विवाद सुलझाने की पहल कर रहे चार विधायकों के अलावा एचएस फूलका भी थे। पर वह कुछ ही देर बाद चले गए। सूत्रों के मुताबिक खैरा गुट ने सिसोदिया से उन्हें हटाने का फैसला बदलने को कहा। लेकिन सिसोदिया ने साफ इंकार कर दिया। पार्टी का कहना था कि एक दलित को नेता प्रतिपक्ष बना कर पार्टी ने एक बड़े वर्ग को आगे लाने की पहल की है।
खैरा गुट का कहना था कि दलित को प्रदेश या जोन प्रधान भी बनाया जा सकता था, सिर्फ नेता प्रतिपक्ष ही क्यों। दोनों ही पक्ष अपनी बात पर अड़े रहे और बैठक बेनतीजा रही। इसके बाद खैरा गुट चला गया। खैरा के करीबी कंवर संधू ने कहा कि हम अपने स्टैंड पर कायम हैं, दो को कांफ्रेंस होगी।