अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। पंजाब में पंथक राजनीति कई कारणों से महत्वपूर्ण मानी जाती है। सियासी दल इस एजेंडे पर मुख्य फोकस रखते हुए इसके माध्यम से पंजाब और पंजाबियों में अपनी पैठ बढ़ाने के लिए कड़ी मशक्कत करते हैं। पंजाब में सिख धर्म की गहरी जड़ें हैं, लिहाजा पंथक राजनीति सिख समुदाय की पहचान और संस्कृति को महत्वपूर्ण बनाती है। इसके चलते आम आदमी पार्टी भी अब अपने पंथक एजेंडे पर सजगता और सक्रियता बढ़ा रही है। इसके लिए श्री गुरु तेग बहादुर जी के 350वें शहीदी दिवस पर आयोजित समागत एक बड़ा जरिया हो सकता है।
आप सरकार इस समागत की भव्यता को बढ़ाकर पंजाबियों में अपनी पैठ और गहरी करना चाहती है। इसके लिए आप सरकार ने तैयारियां शुरू कर दी है। हालांकि इस समागम की कमान खुद सीएम भगवंत मान संभाल रहे हैं पर इस समागम की सफलता की बड़ी जिम्मेवारी शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस को सौंपी गई है। कई दिनों तक चलने वाले इस समागम में एक करोड़ के करीब लोगों के जुटने का अनुमान है। इसके अलावा सभी 23 जिलों में भी सरकार ने इस आयोजन के तहत विभिन्न कार्यक्रमों की रूपरेखा तैयार की है। इस पूरे कार्यक्रम का आयोजन बहुत अच्छे ढंग से हो इसके लिए भी आप सरकार सभी मंत्रियों और विधायकों की विशेष जिम्मेवारी तय करेगी। इतना ही नहीं पहली बार विधानसभा सत्र भी राजधानी चंडीगढ़ से बाहर श्री आनंदपुर साहिब में ही लगाए जाने का प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है। हालांकि इस पर अभी विपक्ष के विधायकों और नेता प्रतिपक्ष से चर्चा की जानी है मगर चूंकि एजेंडा पंथक है, इसलिए इसका विरोध होने की संभावना न के बराबर है। पंथ की चढ़दी कलां के लिए इस विशेष सत्र में कुछ खास प्रस्ताव भी पारित किए जा सकते हैं।
अलग आयोजन पर एसजीपीसी जता चुकी ऐतराज
उधर, शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी श्री गुरु तेग बहादुर जी की 350वीं शहीदी शताब्दी के अवसर पर पंजाब सरकार द्वारा अलग से आधिकारिक समारोह आयोजित करने की घोषणा पर कड़ा ऐतराज जता चुकी है। एसजीपीसी का कहना है कि सिख पंथ की सर्वोच्च धार्मिक संस्था होने के नाते शिरोमणि कमेटी ही सिख संगठनों और संगतों के सहयोग से ऐतिहासिक शताब्दी समारोह आयोजित करने की हकदार है। सरकारों का काम संगत के लिए सुविधाएं मुहैया कराना होता है, न कि धार्मिक मामलों में हस्तक्षेप करना।
इस एतराज से परे आप सरकार इस आयोजन को लेकर किसी विवाद में नहीं पड़ना चाहती। सूबे के शिक्षामंत्री हरजोत सिंह बैंस कहते हैं कि एसजीपीसी सिखों की सर्वाेच्च धार्मिक संस्था है और सरकार के लिए सत्कार योग्य है। इस तरह के किसी भी आयोजन को सफल बनाने के लिए एसजीपीसी यदि सरकार से कोई अपेक्षा करती है तो उसे प्राथमिकता के साथ पूरा किया जाएगा। सरकार का किसी से कोई विवाद नहीं है। बैंस कहते हैं कि सरकार खुद को खुशनसीब मानती है कि गुरुजी का 350वां शहीदी दिवस उनकी सरकार के कार्यकाल में आ रहा है, इसलिए मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए हैं कि इस समागम को यादगार के रूप में मनाया जाए।