आम आदमी पार्टी ने कहा कि सीएम प्रकाश सिंह बादल जल्दबाजी में पानी के बंटवारे के अहम मुद्दे पर कोई फैसला न लें। ऐसे समय में एक गलत फैसला पंजाब को तबाही की ओर से जा सकता है।
आप नेताओं एचएस फूलका, कंवर संधू व सुखपाल खैरा ने कहा कि विधानसभा चुनाव में तीन माह से भी कम समय बचा है। ऐसे में अकाली-भाजपा सरकार के पास अब जनादेश नहीं है। सरकार को नदियों के पानी पर जल्दबाजी में किसी भी तरह का कानूनी या प्रशासनिक फैसला नहीं लेना चाहिए।
इस मामले को लोगों और आने वाली सरकार पर छोड़ देना चाहिए। इस समय कोई भी फैसला मामले को और बिगाड़ सकता है, राज्य को हिंसा की तरफ धकेल सकता है, जैसा कि अस्सी और नब्बे के दशक में हुआ था।
इसलिए बादल आग से न खेलें। आप नेताओं ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला सिर्फ एक राय है, जिस पर इस समय जल्दबाजी में कोई एक्शन लेने की जरूरत नहीं है। सियासी हितों के लिए कोई फैसला लेने के बजाय सीएम केंद्र सरकार को इस पर कोई फैसला लेने से रोकें।
आप ने मांग की कि हरियाणा के निवासी एडवोकेट जनरल अशोक अग्रवाल को हटाया जाए, जोकि ओम प्रकाश चौटाला के समय में हरियाणा के एडवोकेट जनरल रह चुके हैं।
आप नेताओं ने आरोप लगाया कि पानी के मुद्दे पर पंजाब के हितों को नुकसान पहुंचाने के लिए ही अग्रवाल को एजी बनाया गया है। किसी भी मुद्दे पर अदालतों में लड़ाई लड़ना एजी की जिम्मेदारी होती है, लेकिन पंथक सरकार को एक भी पंजाबी कानूनविद नहीं मिला।
उन्होंने आरोप लगाया कि अग्रवाल ने अपने हरियाणा के नेताओं के कहने पर सुप्रीम कोर्ट में पंजाब के केस को कमजोर किया। अब इस मुद्दे पर सरकार को सलाह देने के लिए उन्होंने तीन सदस्यीय कमेटी गठित की है, जिसमें भी दो वकील विनोद भारद्वाज और कमल सहगल हरियाणा से हैं।