चंडीगढ़। मेयर हरप्रीत कौर बबला और विपक्ष के बीच जारी विवाद शुक्रवार को एक बार फिर सामने आ गया। मेयर ने विपक्षी पार्षदों के साथ बैठक बुलाई थी लेकिन आम आदमी पार्टी और कांग्रेस ने इस बैठक का सामूहिक बहिष्कार कर दिया। विपक्ष की तरफ से केवल गुरप्रीत सिंह गाबी ही पहुंचे जबकि बाकी सभी पार्षद नदारद रहे।
दरअसल, 3 नवंबर को नगर निगम सदन की बैठक के दौरान यह मुद्दा उठा था कि हर वार्ड में पार्षदों के लिए जारी किए गए 25-25 लाख रुपये के विकास कार्यों की शुरुआत क्यों नहीं हुई। इस पर मेयर ने आश्वासन दिया था कि वह जल्द ही इसकी समीक्षा बैठक करेंगी और जिन वार्डों में काम शुरू नहीं हुआ है, वहां प्राथमिकता के आधार पर कार्रवाई कराई जाएगी।
दो दिन पहले मेयर ने भाजपा पार्षदों के साथ बैठक की थी और शुक्रवार को विपक्ष को बुलाया गया। मेयर का कहना है कि जगह कम होने के कारण एक साथ 35 पार्षदों की बैठक संभव नहीं थी इसलिए पहले भाजपा और फिर विपक्ष को बुलाया गया। आम आदमी पार्टी के तेरह में से एक भी पार्षद और कांग्रेस के छह में से पांच पार्षद बैठक में नहीं पहुंचे। हालात यह रहे कि चीफ इंजीनियर समेत नगर निगम की पूरी टीम बैठक स्थल पर इंतजार करती रही ताकि समस्याओं पर चर्चा कर समाधान निकाला जा सके। विपक्ष की अनुपस्थिति के कारण बैठक बेनतीजा रह गई।
शहर के विकास में बाधा पैदा करना चाहता विपक्ष
मेयर बबला ने कहा कि विपक्ष की गैरमौजूदगी दर्शाती है कि वे शहर के विकास में सहयोग देने के बजाय बाधा पैदा कर रहे हैं। वहीं, एकमात्र पहुंचे पार्षद गुरप्रीत सिंह गाबी ने कहा कि मेयर ने बैठक बुलाया था तो सभी को आना चाहिए था। राजनीतिक मतभेद अपनी जगह है लेकिन शहर से जुड़े मामलों में सहयोग आवश्यक है।
कांग्रेस ने कहा- राजनीतिक दिखावा थी बैठक
कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष एचएस लक्की ने मेयर के आरोप को भ्रामक और आधारहीन बताया है। उन्होंने कहा कि बिना एजेंडा, बिना तैयारी और बिना संबंधित अधिकारियों की मौजूदगी के बुलाई गई बैठक महज राजनीतिक दिखावा थी, गंभीर समीक्षा नहीं। कांग्रेस पार्षदों की अनुपस्थिति मेयर की पक्षपातपूर्ण कार्यशैली और पारदर्शिता की कमी के खिलाफ लोकतांत्रिक विरोध था। वार्ड-वाइज फंड, सड़कों, सफाई और पार्कों के कार्य मेयर की नाकामी के कारण अटके हैं। कांग्रेस शहर के विकास के लिए प्रतिबद्ध है और मेयर से अपील करती है कि वे झूठे आरोप छोड़कर वादों पर काम करें।