इस उपचुनाव में आप ने जजपा को समर्थन दिया है, भविष्य के चुनाव का फैसला आगे लिया जाएगा। वहीं, जजपी के प्रदेश अध्यक्ष निशान सिंह ने कहा कि अब दोनों पार्टियों के कार्यकर्ता मिलकर दिग्विजय की जीत की राह आसान करेंगे। बता दें कि आप ने हरियाणा में कोई विधानसभा चुनाव नहीं लड़ा है। सोनीपत विधानसभा क्षेत्र से साल 2014 में आप की तरफ से जयसिंह ठेकेदार ने चुनाव लड़ा था।
उन्होंने जींद विधानसभा क्षेत्र से 7300 वोट प्राप्त किए थे। फिलहाल जयसिंह ठेकेदार भाजपा में हैं। गौरतलब है कि जींद उपचुनाव के लिए कांग्रेस से रणदीप सुरजेवाला, इनेलो से उमेद सिंह रेढ़ू, भाजपा से कृष्ण मिड्ढा और जेजेपी से दिग्विजय सिंह चौटाला मैदान में हैं।
सत्ता के लिए दुष्यंत और दिग्विजय ने अपने दादा की पीठ में छुआ घोंपा है। जो लोग अपने सगे दादा के नहीं हुए वे जींद की जनता के क्या होंगे। चुनाव जीतने के लिए दुष्यंत और दिग्विजय आप के साथ मिलकर साजिश रच रहे हैं। दोनों ने दिल्ली सरकार के साथ मिलकर अपने दादा ओमप्रकाश चौटाला की फरलो को रद्द करा दिया है। - अशोक अरोड़ा, इनेलो प्रदेश अध्यक्ष
इनेलो द्वारा आप और जजपा पर ओमप्रकाश चौटाला की फरलो रद्द करवाने के आरोप के बाद सोशल मीडिया पर ओमप्रकाश चौटाला का एक वीडियो वायरल हुआ है। वीडियो उस समय का बताया जा रहा है, जब चौटाला को अस्पताल से जेल ले जाया जा रहा है। इसमें जब पत्रकार ओमप्रकाश चौटाला से बात करते हैं तो वे कहते हैं कि इसका जवाब जींद के मतदाता उमेद सिंह रेढू को भारी मतों से विजयी बनाकर देंगे।
गद्दारों के मुंह पर तमाचा मारेंगे। उन्होंने कहा कि उन्हें जींद का प्रचार नहीं करने दिया जाएगा। इसके लिए साजिश की गई है। इसी साजिश के तहत उनकी फरलो रद्द की गई है। उन्होंने दुष्यंत और दिग्विजय पर कहा कि वे गद्दारों व देशद्रोहियों का कभी समर्थन नहीं करते। उनकी पार्टी इनेलो है और उनके उम्मीदवार उमेद रेढू हैं। साथ ही चौटाला ने कहा कि वे स्वस्थ नहीं हैं, इसके बावजूद उन्हें जबरन अस्पताल से निकाला जा रहा है।
इनेलो की हताशा व चुनावी हार को दिखा रहे हैं आरोप : दुष्यंत
इनेलो द्वारा जेजेपी और आप पर इनेलो सुप्रीमो ओमप्रकाश चौटाला की फरलो रद्द करवाने के आरोपों पर जेजेपी नेता सांसद दुष्यंत चौटाला ने कहा कि इनेलो का बेबुनियाद आरोप उनकी हताशा और जींद उपचुनाव में तय हो चुकी हार को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि यदि वे इतने ताकतवर होते तो अजय सिंह चौटाला को दोबारा छुट्टी पर ले आते। किसी की फरलो वे कैसे रुकवा सकते हैं। यह तो पूरी तरह दिल्ली पुलिस के अधिकार क्षेत्र में है।