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आधार कार्ड ने छीन ली कारगिल शहीद की पत्नी की जान, एक जरूरी जानकारी

Sun, 31 Dec 2017 11:26 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
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कारगिल शहीद की विधवा की जान गई
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आधार कार्ड नहीं मिला तो डॉक्टरों ने इलाज नहीं किया और कारगिल शहीद की विधवा की जान चली गई। मामले में अब एक जानकारी सामने आई है। सोनीपत में कारगिल शहीद लक्ष्मण दास की पत्नी शकुंतला देवी का एक निजी अस्पताल के अड़ियल रवैये की वजह से मौत के मामले जहां हरियाणा के सीएम मनोहर लाल ने जांच के आदेश दे दिए हैं,
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वहीं सूबे के स्वास्थ्य मंत्री ने इस मामले में सीधी कार्रवाई से पल्ला झाड़ते हुए गेंद आर्मी अथारिटी के पाले में सरका दी है। मंत्री अनिल विज ने कहा कि संबंधित अस्पताल आर्मी के इन पैनलमेंट में था, लिहाजा इसमें कार्रवाई सैन्य प्रशासन की ही बनती है। सैन्य प्रशासन को चेक करना चाहिए कि अस्पताल ने इन पैनलमेंट की सभी शर्तों को पूरा किया है या नहीं।

उसके बाद सेना को ही अस्पताल के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए। मंत्री विज ने कहा कि आधार के चक्कर में किसी मरीज के इलाज में देरी करना उचित नहीं है, इसलिए सेना को इस मामले की जांच करवाकर कार्रवाई करनी चाहिए।
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जबकि दूसरी ओर, हरियाणा के सीएम मनोहर लाल ने कहा है कि उनके संज्ञान में ये मामला आया है। वे इस मामले की जांच आला अफसर से करवाएंगें। ताकि ये देखा जाए कि इस मामले में दोषी कौन है? उसके बाद उसके खिलाफ कार्रवाई की जाए।
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फर्जीवाड़ा होता है, इसलिए जरूरी आधार

indian army
सेना के एक आला अफसर ने इस मामले में बताया कि सोनीपत का केस सैन्य अथारिटी के संज्ञान में आया है। उनके अनुसार सेना की ईसीएचएस (एक्स-सर्विसमैन कंट्रीब्यूटरी हेल्थ स्कीम) क्लीनिकों में पूर्व सैनिक व उनके आश्रितों का इलाज करवाते हैं।

लेकिन यदि मरीजों को ईसीएचएस क्लीनिकों से  सेना के पैनल में शामिल निजी अस्पतालों में रेफर किया जाता है तो इसके लिए रेफरल फार्म आधार नंबर की मांग होती है, ताकि ये सुनिश्चित हो सके कि इलाज सही लाभार्थी को ही मिल रहा है। उन्होंने बताया कि कई मामले ऐसे आते हैं जिसमें फर्जीवाड़ा कर इलाज संबंधी कागजी कार्रवाई तो एक्स सर्विसमैन या उनके आश्रितों के नाम से होती है, 

मगर इलाज उनका कोई दूसरा रिश्तेदार या अन्य जानकार व्यक्ति करवाता है। इसी फर्जीवाड़े से बचने के लिए रेफरल के दौरान आधार की मांग की जाती है। अफसर के अनुसार इमरजेंसी केस में आधार दिखाने से पहले इलाज शुरू नहीं होगा, ऐसा कतई अनिवार्य नहीं है। गंभीर मरीज को पहले इलाज दिया जाएगा, बाकी औपचारिकताएं बाद में पूरी होती रहेंगी।
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