चंडीगढ़। सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय की ओर आयोजित तीन दिवसीय राष्ट्रीय चिंतन शिविर का आज चंडीगढ़ में समापन हो गया। इस शिविर में केंद्र, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने मिलकर अंत्योदय का संकल्प, अमृत काल का प्रतिबिंब विकसित भारत 2047 के विजन को साकार करने के लिए एक ठोस और समयबद्ध रणनीति तैयार की है।
केंद्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्री डॉ. वीरेंद्र कुमार ने समापन सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि यह शिविर केवल नीतिगत चर्चाओं तक सीमित नहीं था, बल्कि इसमें छात्रवृत्ति, नशामुक्ति, वरिष्ठ नागरिक कल्याण और दिव्यांगजनों के लिए सुगम्यता जैसे विषयों पर व्यावहारिक समाधान खोजे गए हैं। उन्होंने जोर दिया कि तकनीक के माध्यम से प्रक्रियाओं को सरल बनाकर लाभ सीधे और बिना देरी के लाभार्थियों तक पहुंचाया जाएगा।
शिविर के मुख्य निर्णय और सिफारिशें
बैठक में ऐतिहासिक रूप से हाशिए पर रहे गैर-अधिसूचित, खानाबदोश और अर्ध-घुमंतू समुदायों को 2027 की जनगणना में शामिल करने और उनके आर्थिक सशक्तिकरण के लिए सीड योजना को मजबूत करने पर सहमति बनी। इसके साथ ही दिव्यांगजनों के लिए सार्वजनिक बुनियादी ढांचे, परिवहन और डिजिटल प्लेटफॉर्म को पूरी तरह सुलभ बनाने हेतु 2027-28 तक कड़े मानक तय करने और एक्सेसिबिलिटी ऑडिट कराने का लक्ष्य रखा गया है। इसके साथ दिव्यांगता प्रमाण पत्र जारी करने की प्रक्रिया को सरल और बाधा मुक्त बनाया जाएगा।
ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के लिए गरिमा गृह सुरक्षा सेल और कल्याण बोर्डों के माध्यम से व्यापक पुनर्वास और सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने पर जोर दिया गया है। अनुसूचित जाति और ओबीसी समुदायों के लिए ऋण तक पहुंच को लोकतांत्रिक बनाने, कौशल विकास और उद्यमिता सहायता को पीएम-अजय जैसी योजनाओं के साथ जोड़ने का रोडमैप तैयार किया गया है। छात्रवृत्ति और पेंशन जैसी योजनाओं में कागजी कार्रवाई को कम करने, डिजिटल मॉनिटरिंग बढ़ाने और फंड के प्रवाह को सुचारू बनाने के लिए ठोस कदम उठाने पर चर्चा हुई।