अनाज मंडी में रविवार को ढींढसा परिवार की तरफ से की गई पंथक रैली में अकाली दल टकसाली के नेताओं ने बड़ी तादाद में शिरकत की। मंच से प्रस्ताव पारित करते हुए सुखबीर सिंह बादल को अध्यक्षता से बर्खास्त किया गया। सुखदेव ढींढसा ने एलान किया कि एसजीपीसी चुनाव ढींढसा परिवार अकाली दल टकसाली के साथ मिलकर लड़ेगा। उसके बाद विधानसभा चुनाव में भी हिस्सा बनेगा।
ढींढसा ने कहा कि बेशक अकाली दल उनकी रैली को कांग्रेस की रैली कह रहा है लेकिन सच्चाई सभी के सामने है कि लोग किस तरह उनके साथ खड़े हैं। वह किसी के समर्थक नहीं बल्कि अकाली दल की सोच के समर्थक हैं। उनका मकसद अकाली दल की पुरानी सोच को विकसित करना है। बादल परिवार इसे खत्म कर रहा है। ढींढसा ने स्पष्ट किया कि विरोध सिर्फ उन्होंने अब नहीं बल्कि पार्टी में रहते हुए भी काफी समय पहले शुरू कर दिया था। अकाली दल से नाराज होकर भी सीनियर नेता अगले सप्ताह के बाद उनके साथ जुड़ रहे हैं।
परमिंदर ढींढसा ने कहा कि उनका मकसद सिर्फ एक है कि सबसे पहले शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी को किसी तरह से बादलों से आजाद करवाया जाए। लगातार एसजीपीसी पर सवाल खड़े हो रहे हैं। चाहे वह एसजीपीसी की ओर से खर्च किए जा रहे पैसे की बात हो यार दो साल होने के बावजूद भी अब तक एसजीपीसी का चुनाव नहीं करवाने की बात हो। उन्होंने बोनी के अकाली दल में दोबारा वापसी के सवाल पर कहा कि अकाली दल टकसालियों में शामिल नेताओं को पंथ विरोधी का खिताब देते हैं। बोनी और उनका परिवार दोबारा अकाली में शामिल होकर पंथ हितैषी हो गया है।
इस दौरान लौंगोवाल में हुए हादसे में दुख व्यक्त करते हुए मासूम बच्चों को श्रद्धासुमन भेंट किए गए। साथ ही बलवंत सिंह राजोआना समेत जेलों में बंद अन्य सिंहों की फांसी की सजा को रद्द करने की कार्रवाई को अमली जामा पहनाने की मांग की गई। मौजूदा समूह ने श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की बेअदबी और बहिबल कलां गोलीकांड के लिए जिम्मेदार लोगों को सख्त सजा देने की मांग की।