-सीनियर वकील हरीश राय ढांडा और एसीपी बेअंत जुनेजा के बीच तीखी बहस, पुलिस कार्रवाई के खिलाफ वकीलों ने किया प्रदर्शन
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संवाद न्यूज एजेंसी लुधियाना।
लापता 328 स्वरूपों के मामले में जांच कर रही एसआईटी ने वीरवार शाम टैगोर नगर स्थित चार्टर्ड अकाउंटेंट (सीए) अश्वनी कुमार के दफ्तर में छापा मारा। यह कार्रवाई एसजीपीसी के पूर्व ऑडिटर सतिंदर पाल सिंह कोहली की निशानदेही पर की गई। अमृतसर से आई टीम और एसीपी बेअंत जुनेजा भी मौजूद रहे।
सीए अश्वनी कुमार मौजूद नहीं थे लेकिन उनका बेटा वहां था। पुलिस ने आवश्यक रिकाॅर्ड, कंप्यूटर और फाइलें जब्त कीं। बाहर खड़े अन्य सीए और वकीलों ने कार्रवाई का विरोध किया। सीनियर वकील हरीश राय ढांडा ने पुलिस पर धक्केशाही का आरोप लगाया और एसीपी जुनेजा के साथ तीखी बहस की। वकीलों ने नारेबाजी की और सरकार के खिलाफ विरोध जताया।
एसआईटी ने कोहली से पूछताछ के बाद इनपुट्स के आधार पर छापा मारा। एसीपी जुनेजा ने कहा कि कार्रवाई कानून के तहत हुई और किसी के साथ दुर्व्यवहार नहीं किया गया। उन्होंने बताया कि रिकाॅर्ड कब्जे में ले लिए गए और सारी कार्रवाई सीए के बेटे की मौजूदगी में की गई। ढांडा ने आरोप लगाया कि कार्रवाई सिर्फ राजनीतिक रूप से परेशान करने के उद्देश्य से की गई और सीए के कर्मचारियों के साथ दुर्व्यवहार किया गया। उन्होंने कहा कि वकील सोमवार को मीटिंग कर आगे की रणनीति बनाएंगे। इस दौरान सीनियर वकील हरीश राय ढांडा और एसीपी बेअंत जुनेजा के बीच तीखी बहस भी हुई।
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पूर्व जत्थेदार रणजीत सिंह बोले- सीएम को तलब करना पंथक मर्यादाओं का उल्लंघन
संवाद न्यूज एजेंसी
अमृतसर। श्री अकाल तख्त साहिब के पूर्व जत्थेदार भाई रणजीत सिंह ने वर्तमान जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज्ज पर अकाल तख्त की परंपराओं और पंथक मर्यादाओं का उल्लंघन करने का गंभीर आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि गैर-अमृतधारी और दाढ़ी-कैस कटवाने वाले मुख्यमंत्री को तख्त में तलब करना पंथक मर्यादाओं के खिलाफ है। रणजीत सिंह ने जत्थेदार गड़गज्ज के बयान पर आपत्ति जताई, जिसमें कहा गया कि मुख्यमंत्री को सचिवालय में तलब किया गया। उन्होंने स्पष्ट किया कि सचिवालय भी अकाल तख्त का अभिन्न हिस्सा है और इस तरह के तर्क से पंथक मर्यादाओं को कमजोर नहीं किया जा सकता।
पूर्व जत्थेदार ने चेतावनी दी कि जत्थेदार को अकाली दल बादल गुट के नेताओं और एसजीपीसी पदाधिकारियों की अनियमितताओं में ढाल बनने से बचना चाहिए। उन्होंने कहा कि अकाल तख्त के जत्थेदार की जिम्मेदारी पंथक सिद्धांतों की रक्षा करना है, न कि राजनीतिक दबावों के आगे झुकना। रणजीत सिंह ने एसजीपीसी को निर्देश दिया कि श्री गुरु ग्रंथ साहिब से जुड़े मामलों में जांच एजेंसियों का पूरा सहयोग किया जाए। उन्होंने कहा कि यदि सच्चाई सामने नहीं आती, तो सिख पंथ ऐसे पदाधिकारियों को कभी माफ नहीं करेगा।