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Highcourt: सार्वजनिक पद पर बैठे व्यक्ति का आहत होना कार्रवाई का आधार नहीं, पत्रकारों के खिलाफ जांच पर रोक

Wed, 21 Jan 2026 07:51 PM IST
चंडीगढ़ ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

अदालत ने स्पष्ट किया कि पत्रकारिता की स्वतंत्रता, आलोचना और व्यंग्य लोकतंत्र के मूल स्तंभ हैं और आपराधिक कानून का इस्तेमाल आलोचना दबाने के औजार के रूप में नहीं किया जा सकता।
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पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने मुख्यमंत्री से जुड़े हेलीकॉप्टर उपयोग मामले में प्रकाशित समाचार के संबंध में पत्रकारों और अन्य व्यक्तियों के खिलाफ दर्ज एफआईआर की आगे की जांच पर अंतरिम रोक लगा दी है।
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जस्टिस विनोद एस. भारद्वाज ने कहा कि केवल किसी सार्वजनिक पद पर बैठे व्यक्ति के आहत होने के आधार पर आपराधिक कार्रवाई नहीं की जा सकती और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का समान रूप से संरक्षण किया जाना चाहिए।

याचिकाकर्ता मनिक गोयल और अन्य ने लुधियाना साइबर क्राइम थाने में दर्ज एफआईआर को रद्द करने की मांग की थी। उनका तर्क था कि समाचार आरटीआई के माध्यम से मांगी गई और सुरक्षा कारणों से रोकी गई हेलीकॉप्टर उपयोग की जानकारी और सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध फ्लाइट-ट्रैकिंग डेटा पर आधारित था।
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पंजाब सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता ने दलील दी कि सामग्री भड़काऊ है और सार्वजनिक शांति भंग कर सकती है इसलिए जांच जारी रहनी चाहिए। अदालत ने स्पष्ट किया कि पत्रकारिता की स्वतंत्रता, आलोचना और व्यंग्य लोकतंत्र के मूल स्तंभ हैं और आपराधिक कानून का इस्तेमाल आलोचना दबाने के औजार के रूप में नहीं किया जा सकता। हालांकि अदालत ने मीडिया से नैतिक पत्रकारिता, सत्यनिष्ठा और निष्पक्षता बनाए रखने की अपेक्षा भी जताई। हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार को नोटिस जारी करते हुए 23 फरवरी 2026 तक जवाब मांगा और तब तक एफआईआर की जांच पर रोक कायम रखी।

इस आदेश से स्पष्ट संदेश गया कि सार्वजनिक पद पर रहने वाले व्यक्ति की संवेदनशीलता अकेली आपराधिक कार्रवाई का आधार नहीं बन सकती और लोकतंत्र में स्वतंत्र मीडिया की भूमिका अहम बनी रहेगी।
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