चंडीगढ़ के अटावा के रहने वाले विक्रम सिंह पुंडीर को 1413 दिनों के बाद अपना ड्राइविंग लाइसेंस तो मिला, लेकिन एक्सपायर होने के बाद। विक्रम का लाइसेंस दो फरवरी 2017 को चंडीगढ़ ट्रैफिक पुलिस ने जब्त कर लिया था।
विक्रम के मुताबिक, 2 फरवरी 2017 को सेक्टर-21 के पेट्रोल पंप से पेट्रोल भरवाकर सेक्टर 20-21-33-34 चौक से यूटर्न होकर वापस आ रहे थे, तभी ट्रैफिक पुलिस ने उन्हें रोककर कहा कि लाल बत्ती को पार किया है चालान कटेगा लेकिन पुंडीर ने कहा कि उन्होंने लाल बत्ती को पार नहीं किया है। काफी देर बहस होने के बाद ट्रैफिक पुलिस ने चालान काटकर उनका ड्राइविंग लाइसेंस जब्त कर लिया। विक्रम ने चौक पर लगी सीसीटीवी कैमरे की फुटेज मांगी, लेकिन यह कहकर मना कर दिया गया कि कैमरे खराब हैं।
इसके बाद उन्होंने अदालत का सहारा लेकर पुलिस के चालान को चुनौती दी। कोर्ट में सुनवाई शुरू हुई। जब ट्रैफिक पुलिस की ओर से सुबूत पेश करने की बारी तो उन्होंने हाथ खड़े कर दिए। उनका कहना था कि जब यह मामला हुआ तो उस दौरान चौक के सीसीटीवी कैमरे खराब थे। साथ ही चालान में काफी कांट-छांट की गई थी। पहले पीली लाइट पार का निशान लगा था, जिसे बाद में लाल कर दिया गया।
विक्रम ने जिस ट्रैफिक पुलिस आफिसर के खिलाफ शिकायत दी थी, बाद में उसे ही उनके मामले का जांच अधिकारी बना दिया गया। कोर्ट में सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि यदि किसी ने जुर्म किया है तो उसके खिलाफ सुबूत भी एकत्र करने चाहिए। जिस तरह से ओवरस्पीड के लिए स्पीडोमीटर, डंकन ड्राइविंग के लिए एल्कोसेंसर और इस केस में सीसीटीवी अहम सुबूत हो सकते थे।
26 फरवरी 2020 को अदालत ने ट्रैफिक पुलिस का चालान रद्द कर विक्रम के पक्ष में फैसला सुनाया।
इसके बाद विक्रम ने अदालत में आवेदन दायर कर ड्राइविंग लाइसेंस वापस दिलाने की मांग की लेकिन तब तक कोरोना के कारण अदालत का कामकाज ठप हो गया। जब अदालत खुली तो विक्रम ने चक्कर लगाने शुरू किए। करीब दो से तीन महीने चक्कर लगाने के बाद 16 दिसंबर को उन्हें अदालत से लाइसेंस मिला। इस अदालती कार्रवाई में 1413 दिन बीत गए।
जब विक्रम को लाइसेंस मिला, तो पता चला कि लाइसेंस एक्सपायर हो चुका है। अप्रैल में ही लाइसेंस की मियाद खत्म हो गई थी। विक्रम ने कहा कि अब उन्हें लाइसेंस को रिन्यू करवाने के लिए दोबारा से मशक्कत करनी पड़ेगी। उनके मुताबिक पुलिस ने यदि उनकी बात मान लेती तो इतनी जद्दोजहद नहीं करनी पड़ती। पुलिस अपनी जिद पर अड़ी रही, जबकि उसे पब्लिक फ्रेंडली होना चाहिए था।