इस मामले में पुलिस ने नगिंदर सिंह को गिरफ्तार कर राजू को भगौड़ा करार दे दिया। इसके बाद नगिंदर सिंह दोबारा हाईकोर्ट में पहुंचा और अज्ञात शव को फिर अपने बेटे का बताया। अदालत ने जिला सेशन जज को मामले की जांच सौंप दी।
सेशन जज ने तत्कालीन डीएसपी अमरजीत सिंह खैहरा, एएसआई जसवंत सिंह और हवलदार काबल सिंह के खिलाफ हत्या के आरोप में मामला दर्ज करने की सिफारिश की। 21 अगस्त 2010 को थाना डेहलों में तीनों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया। अभी यह मामला अदालत में चल रहा है, इस पर अगली सुनवाई 2 सितंबर को होनी है।
14 साल से पीड़ित मुलाजिम कर रहे थे ट्रैक
राजू की हत्या में फंसे तीनों पुलिस मुलाजिमों को एक बात साफ थी कि वह मरा नहीं है। इसलिए वह खुद को बेगुनाह साबित करने की कोशिश में जुटे हुए थे। इस दौरान डीएसपी अमरजीत सिंह रिटायर भी हो गए। गुरुवार देर शाम को जगरांव सीआईए स्टाफ ने गुप्त सूचना के आधार पर राजू को गांव भूंदड़ी से हिरासत में लिया। राजू ने खुलासा किया कि उसके पिता नगिंदर सिंह को पता था कि वह जिंदा है। वह हिमाचल, यूपी और दिल्ली स्थित कई ठिकानों पर पहचान छुपाकर रह रहा था।