उसकी रिपोर्ट भी 17 मई को निगेटिव आई। लेकिन सुबह तड़के उसकी सांस उखड़ी और वेंटिलेटर पर डालने के 6 घंटे बाद मौत हो गई। सिविल अस्पताल एसएमओ डॉ. भूपिंदर सिंह ने बताया कि जयपाल की अंतिम दो रिपोर्ट निगेटिव आई थी। अगर उसकी सेहत में सुधार हो जाता तो सोमवार को उसे अस्पताल से छुट्टी मिल जाती। वहीं, देर शाम को जयपाल के पैतृक गांव मामून के श्मशान घाट पर प्रशासन की देखरेख में जयपाल का अंतिम संस्कार कर दिया गया। अमृतसर से एंबुलेंस सीधे श्मशानघाट पहुंची संस्कार के समय स्वास्थ्य विभाग का एक डॉक्टर भी मौजूद रहा।
भाई पर जबरदस्ती लगाया कोरोना ठप्पा: जयकरण
मृतक के भाई जयकरण ने बताया कि उसका भाई टीबी का मरीज था, ना कि कोरोना का। परिवार सहित 41 लोगों के सैंपल लिए, जो सभी निगेटिव आए। अधिकारियों की लापरवाही के कारण उसकी रिपोर्ट पॉजिटिव आई होगी। लेकिन उसके भाई पर कोरोना संक्रमित का ठप्पा लगा दिया। अमृतसर में उसे सही इलाज नहीं मिला। इस कारण उसकी मौत हुई। अगर वह भाई को छुट्टी दे देते तो उसका कहीं अन्य जगह इलाज करवाते तो शायद उसकी जान बच जाती।